1. स्क्रीन टाइम कंट्रोल
अब पैरंट्स यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा YouTube शॉर्ट्स (Shorts) कितनी देर तक देखे। इसके लिए शॉर्ट्स स्क्रॉल करने का समय तय किया जा सकेगा। पैरंट्स चाहें तो इस टाइमर को पूरी तरह जीरो भी कर सकेंगे। यानी अगर बच्चा पढ़ाई कर रहा है या होमवर्क पर ध्यान देना है, तो Shorts बिल्कुल बंद किए जा सकते हैं। वहीं, अगर परिवार कार से कहीं जा रहा है तो YouTube पर विडियो देखने का वक्त 30 या 60 मिनट तय किया जा सकता है। YouTube का कहना है कि इंडस्ट्री में पहली बार ऐसा फीचर लाया गया है। इससे पैरंट्स को बच्चों के शॉर्ट्स कंटेंट पर पूरा कंट्रोल मिलता है। इसके अलावा सोने के समय और बीच-बीच में ब्रेक लेने के लिए रिमाइंडर भी पैरंट्स अपनी जरूरत के हिसाब से सेट कर सकेंगे।
2. कंटेंट टीन्स लायक हो
दूसरा बड़ा बदलाव टीन्स के लिए बेहतर और अर्थपूर्ण कंटेंट को बढ़ावा देने से जुड़ा है। YouTube ने इसके लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इसका मकसद है कि टीन्स को ऐसा कंटेंट दिखे जो सिर्फ मजेदार ही नहीं, बल्कि उनकी उम्र के हिसाब से सही और सीखने वाला भी हो। यह गाइड यूथ एक्सपर्ट्स, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स और अमेरिकन साइकॉलजिकल असोसिएशन जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर तैयार की गई है। इसके तहत खान अकैडमी, क्रैशकोर्स और पढ़ाई-लिखाई से जुड़े कंटेंट टीन्स को ज्यादा दिखाए जाएंगे। इसके साथ ही YouTube अपने रिकमेंडेशन सिस्टम में भी बदलाव करेगा, ताकि कम क्वॉलिटी या भटकाने वाले विडियो की जगह पॉजिटिवटी और जानकारी बढ़ाने वाला कंटेंट सामने आए।
3. अकाउंट मैनेजमेंट
तीसरा बदलाव परिवारों के लिए अकाउंट मैनेजमेंट को आसान बनाने से जुड़ा है। जल्द ही YouTube एक नया साइन-अप सिस्टम लाने वाला है। उससे पैरंट्स आसानी से बच्चों के लिए नया अकाउंट बना सकेंगे। इसके साथ ही मोबाइल ऐप में कुछ ही टैप में किड अकाउंट, टीन अकाउंट और पैरंट अकाउंट के बीच स्विच किया जा सकेगा। इससे यह फायदा होगा कि घर में जो भी YouTube देख रहा है, उसे उसकी उम्र के हिसाब से सही कंटेंट और सही सेटिंग्स मिलेगी। इससे सिस्टम से पैरंट्स को बार-बार सेटिंग्स बदलने की झंझट नहीं होगी और यह साफ तौर पर दिखेगा कि उस समय कौन YouTube देख रहा है।














