उन्होंने कहा कि 2013 से 2022 तक एफटीए वार्ता के स्थगित रहने से भारत को नौकरियों, आय और विकास के रूप में भारी कीमत चुकानी पड़ी। गोयल ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद आर्थिक सौदा बताया, जिससे भारत के लिए विकास और रोजगार के बड़े अवसर खुलेंगे।
दरअसल जयराम रमेश ने एक एक्स पोस्ट में इस एफटीए को ‘बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया’ बताया था और व्यापार घाटा, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM), ऑटोमोबाइल, बौद्धिक संपदा और रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट जैसी चिंताओं को उठाया था। गोयल ने इन आलोचनाओं को राजनीतिक रूप से प्रेरित और आर्थिक हकीकत से कोसों दूर बताया।
उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रही है, तब उनके दोस्त को यह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया लग रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी, 11 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक व्यापार और लगभग दो अरब लोगों के साझा बाजार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस ने क्या चिंता जाहिर की?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत की ओर से किसी भी व्यापार भागीदार को दिया गया सबसे बड़ा व्यापारिक खुलापन है। इससे ईयू से आने वाले सामानों पर 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर टैरिफ कम हो गया है। रमेश ने चेतावनी दी है कि इससे ईयू से आयात दोगुना हो सकता है और भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है।
गोयल ने इसका जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने CBAM और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सक्रिय रूप से बातचीत की है। उन्होंने विश्वास के साथ कहा, ‘मैं पूरे यकीन से कह सकता हूं कि हमारी सरकार ने CBAM के मुद्दे को उठाया है… और समाधान खोजने के रास्ते पहचाने हैं।’ उन्होंने कठोर रुख अपनाने के बजाय बातचीत और सहयोग पर जोर दिया।
18 साल बाद बड़ी कामयाबी
बता दें कि भारत और ईयू ने 2007 में एफटीए वार्ता शुरू की थी, जिसमें 16 दौर पूरे हुए थे, लेकिन 2013 में अनसुलझे मुद्दों पर बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई और मंगलवार को यानी 18 साल बाद इसे अंतिम रूप दिया गया और इसकी घोषणा की गई।















