चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने CAQM से पूछा कि क्या वे प्रदूषण के मुख्य कारणों का पता लगा पाए हैं। कोर्ट ने कहा कि आजकल सार्वजनिक रूप से बहुत सारी जानकारी सामने आ रही है, विशेषज्ञ लेख लिख रहे हैं, लोगों की राय आ रही है और वे हमें ईमेल से भी जानकारी भेज रहे हैं।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि भारी वाहन प्रदूषण बढ़ाने में बड़ा योगदान देते हैं। इसलिए, कोर्ट ने पूछा कि इसका समाधान कैसे निकाला जाए। बेंच ने कहा, ‘दो जनवरी को बैठक बुलाना और हमसे कहना कि हम दो महीने बाद आएंगे, यह हमें स्वीकार्य नहीं है। CAQM अपने कर्तव्य के पालन में विफल हो रहा है।’
सुप्रीम कोर्ट ने CAQM को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रदूषण के दीर्घकालिक समाधानों पर चरणबद्ध तरीके से सोचना शुरू करे। साथ ही, विभिन्न पक्षों के विचारों से प्रभावित हुए बिना टोल प्लाजा के मुद्दे पर भी विचार करे। कोर्ट ने CAQM को फटकार लगाते हुए कहा कि वह प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए और इस मामले में देरी न करे।
‘सभी को मिलकर काम करना होगा’
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और इसके समाधान के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। CAQM जैसी संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और समय पर कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि CAQM भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेगा और प्रदूषण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।














