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  • अब क्या करेगा पाकिस्तान? भारत 31 और खतरनाक फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में; इस देश के साथ जल्द हो सकती है डील

    नई दिल्ली: भारत राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद में बढ़ोतरी करने की तैयारी में है, जो कि पाकिस्तान के लिए सबसे बुरी खबर हो सकती है। दरअसल, एक फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए प्रस्तावित 114 विमानों के अलावा अतिरिक्त 31 राफेल मरीन फाइटर


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    By Azad Hind Desk फरवरी 15, 2026
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    नई दिल्ली: भारत राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद में बढ़ोतरी करने की तैयारी में है, जो कि पाकिस्तान के लिए सबसे बुरी खबर हो सकती है। दरअसल, एक फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के लिए प्रस्तावित 114 विमानों के अलावा अतिरिक्त 31 राफेल मरीन फाइटर जेट की मांग की है।

    फ्रांसीसी समाचार पत्र ला ट्रिब्यून में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने भारतीय वायु सेना के लिए निर्धारित 114 लड़ाकू विमानों के बड़े ऑर्डर के अलावा 31 राफेल मरीन लड़ाकू जेट विमानों की आपूर्ति के लिए फ्रांस से अनुरोध किया है। ला ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यदि यह ऑर्डर अंतिम रूप ले लेता है, तो भारत द्वारा ऑर्डर किए गए राफेल विमानों की कुल संख्या 145 हो जाएगी।

    इस डील से भारत के राफेल बेड़े में जबरदस्त विस्तार होने वाला है। बता दें कि भारत ने डसॉल्ट एविएशन के साथ पहले ही 62 राफेल जेट के लिए दो अनुबंध किए हैं, जिनमें से 36 भारतीय वायु सेना के लिए 2016 में और 26 भारतीय नौसेना के लिए अप्रैल 2025 में तय किए गए थे।

    भारतीय नौसेना को पहले ही इस विमान की जरूरत हुई थी

    रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय नौसेना, जिसने सबसे पहले इस विमान की आवश्यकता महसूस की थी, ने कई साल पहले 31 नए राफेल मरीन जेट की आवश्यकता का अनुमान लगाया था। यदि यह विस्तारित ऑर्डर पूरा हो जाता है, तो भारतीय नौसेना के पास 57 राफेल मरीन जेट हो जाएंगे, जो फ्रांस के अपने 41 नौसैनिक वेरिएंट के बेड़े से कहीं अधिक हैं।

    राफेल मरीन विमान की क्यों जरूरत पड़ी?

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत के राफेल मरीन विमान मुख्य रूप से भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की मदद से संचालित किया जाएगा और संभवतः रूस के पूर्व आधुनिक पोत आईएनएस विक्रमादित्य से भी। भारत एक तीसरे विमानवाहक पोत की भी योजना बना रहा है, जिससे परिचालन संबंधी आवश्यकताएं और बढ़ सकती हैं।

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