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  • अब स्मार्टफोन स्कैन कर लेगा ब्रेस्ट कैंसर, वैज्ञानिकों ने बनाया छोटा अल्ट्रासाउंड डिवाइस, जानें किस तरह से करेगा काम?

    MIT के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस बनाया है, जो ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है। दरअसल यह डिवाइस इतना छोटा है कि इसे घर या डॉक्टर के क्लीनिक पर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। 500 ग्राम से भी हल्का यह डिवाइस न सिर्फ किफायती


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    By Azad Hind Desk फरवरी 5, 2026
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    MIT के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस बनाया है, जो ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है। दरअसल यह डिवाइस इतना छोटा है कि इसे घर या डॉक्टर के क्लीनिक पर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। 500 ग्राम से भी हल्का यह डिवाइस न सिर्फ किफायती है बल्कि दूरदराज के उन इलाकों की महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जहां आस-पास अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं होती। चलिए इस अनोखे आविष्कार के बारे में डिटेल में जानते हैं।

    स्मार्टफोन जितना छोटा सिस्टम

    MIT की एसोसिएट प्रोफेसर कानन दागदेविरेन और उनकी टीम द्वारा तैयार यह डिवाइस बड़ी-बड़ी और महंगी अल्ट्रासाउंड मशीनों को चुनौती देता है। आकार में यह डिवाइस एक स्मार्टफोन जितना ही छोटा है। इस डिवाइस में एक प्रोसेसिंग मॉड्यूल भी होता है, जो कि फोन से थोड़ा ही बड़ा होता है। इसे बनाने में सिर्फ 300 डॉलर यानी कि 25 हजार का खर्च आया है। यह डिवाइस बहुत ही आसानी से लैपटॉप से कनेक्ट होकर 3D इमेज दिखा सकता है। बड़ी बात है कि इसे चलाने में ज्यादा बिजली भी इस्तेमाल नहीं होती। इसे एक नॉर्मल 5V DC अडैप्टर या बैटरी से भी चलाया जा सकता है।

    कैसे काम करता है पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस

    एक स्टैंडर्ड अल्ट्रासाउंड मशीन में प्रोब को शरीर पर दबाना पड़ता है, इससे कई बार इमेज बिगड़ भी जाती है। वहीं वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया नया डिवाइस त्वचा के ऊपर धीरे से रखा जाता है, जिससे टिश्यू की असली और सटीक 3D तस्वीर मिलती है। यह डिवाइस शरीर के अंदर 15 सेटीमीटर तक स्कैन कर सकता है।

    इस डिवाइस से पूरे ब्रेस्ट का डेटा 2-3 जगहों से स्कैन करके निकाला जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च करने वालों ने इसे एक 71 वर्षीय महिला पर टेस्ट किया है। टेस्टिंग में यह डिवाइस बिना किसी गैप के सिस्ट (गांठों) की सटीक पहचान कर पाया।

    AI और भविष्य की बड़ी तैयारी

    रिपोर्ट के मुताबिक, (REF.) वैज्ञानिक अब इस टेक्नोलॉजी को और छोटा करने पर काम कर रहे हैं, ताकि डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम एक नाखून के बराबर हो जाए। आने वाले समय में यह डिवाइस सीधे फोन से कनेक्ट हो पाएगा। इसके अलावा डिवाइस के लिए एक AI बेस्ड ऐप भी बनाने पर काम हो रहा है, जो कि यूजर को समझाएगा कि सेंसर को शरीर पर किस जगह रखने की जरूरत है। प्रोफेसर दागदेविरेन अब इस तकनीक को बाजार में लाने के लिए कंपनी लॉन्च करने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य है कि ब्रेस्ट कैंसर की पहचान घर बैठे उतनी ही आसान हो जाए, जितना कि अपना ब्लड प्रेशर चेक करना।

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