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  • अमेरिका और ईरान में परमाणु वार्ता, क्या टल गया युद्ध का खतरा? मध्यस्थ ओमान ने क्या बताया

    मस्कट: ओमान ने शुक्रवार को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थता की। ओमान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ईरान और अमेरिका के वार्ताकारों के काफिले ओमान के शीर्ष राजनयिक के साथ अलग-अलग बैठक के लिए मस्कट पहुंचे।


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    By Azad Hind Desk फरवरी 6, 2026
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    मस्कट: ओमान ने शुक्रवार को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थता की। ओमान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ईरान और अमेरिका के वार्ताकारों के काफिले ओमान के शीर्ष राजनयिक के साथ अलग-अलग बैठक के लिए मस्कट पहुंचे। हालांकि, अमेरिका और ईरान की तरफ से इस घटनाक्रम पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इससे यह संकेत मिल रहा है कि अब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम हो सकता है।

    ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों की मुलाकात

    समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के संवाददाताओं ने ईरानी अधिकारियों को मस्कट के बाहरी इलाके में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित एक पैलेस में देखा। संवाददाताओं के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों का काफिला कुछ देर बाद पैलेस से कुछ दूर स्थित एक होटल के लिए रवाना हो गया। इस बीच, ईरान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची मस्कट में अपने ओमानी समकक्ष बद्र अल-बुसैदी से मिले।

    ईरानी विदेश मंत्री के जाने के बाद पहुंचे अमेरिकी वार्ताकार

    ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के संवाददाताओं के अनुसार, ईरानी अधिकारियों के पैलेस से रवाना होने के बाद एक अन्य काफिला वहां दाखिल हुआ, जिसमें शामिल एक एसयूवी पर अमेरिकी झंडा लहरा रहा था। संवाददाताओं ने बताया कि यह काफिला लगभग डेढ़ घंटे तक पैलेस में रुका और फिर वहां से रवाना हो गया। ओमान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि अल-बुसैदी ने पहले अराघची और फिर पश्चिम एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से अलग-अलग मुलाकात की।

    ओमान ने अमेरिका-ईरान बैठक पर क्या कहा

    बयान में कहा गया है, “बातचीत मुख्यत: राजनयिक और तकनीकी वार्ताओं को फिर से शुरू करने के लिए उपयुक्त परिस्थितियां तैयार करने पर केंद्रित थी, क्योंकि दोनों पक्ष स्थायी सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने के लिए इनकी सफलता सुनिश्चित करने के वास्ते दृढ़ संकल्पित हैं।” फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आज आगे और बातचीत की जाएगी या नहीं। हालांकि, ओमानी अधिकारी अमेरिकी काफिले के जाने के तुरंत बाद पैलेस से चले गए।

    अमेरिका-ईरान में पहले भी हो चुकी है बातचीत

    अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत पिछले साल जून में उस समय विफल हो गई थी, जब इजराइल ने तेहरान पर हमला कर दिया था। दोनों देशों के बीच 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर बम बरसाए थे, जिससे यूरेनियम संवर्द्धन के काम में जुटे कई सेंट्रीफ्यूज संभवत: नष्ट हो गए थे। वहीं, इजराइली हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को निशाना बनाया गया था। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के काफिले को मस्कट के बाहरी इलाके में जिस पैलेस में प्रवेश करते देखा गया, उसका इस्तेमाल ओमान ने 2025 में ईरान और अमेरिका के बीच हुई पिछली वार्ताओं में भी किया था।

    ईरान में प्रदर्शनों पर अमेरिका ने क्या कहा

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो सहित अन्य शीर्ष नेताओं का मानना है कि ईरान में मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन को लेकर पिछले महीने हुए देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बाद देश का धर्म आधारित शासन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अपने सबसे कमजोर दौर में है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि ट्रंप वर्षों के छद्म युद्ध, आर्थिक संकट और आंतरिक अशांति के कारण अस्थिरता के दौर से गुजर रहे ईरान को नये परमाणु समझौते के लिए तैयार होने पर मजबूर कर सकते हैं।

    गुरुवार को मस्कट पहुंचे थे ईरानी विदेश मंत्री

    ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने बताया कि अराघची कई ईरानी राजदूतों के साथ गुरुवार रात मस्कट पहुंचे। अराघची ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ईरान स्पष्ट दृष्टिकोण और बीते साल की घटनाओं को स्मृति में रखते हुए कूटनीति शुरू कर रहा है। प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाना चाहिए।” उन्होंने लिखा, “समान दर्जा, आपसी सम्मान और आपसी हित केवल खोखले वादे नहीं हैं – ये अनिवार्य हैं और एक टिकाऊ समझौते के स्तंभ हैं।”

    खामेनेई के सलाहकार ने क्या कहा

    वार्ता से पहले ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के प्रमुख सलाहकार अली शमखानी ने अराघची के लिए समर्थन के संकेत दिए। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “अराघची फैसले लेने और सैन्य खुफिया जानकारी के मामले में शीर्ष स्तर के एक कुशल, रणनीतिक और भरोसेमंद वार्ताकार हैं।” शमखानी ने लिखा, “सशस्त्र बलों के सैनिक और कूटनीति के सेनापति सर्वोच्च नेता के आदेश के अनुसार काम करते हुए राष्ट्र के हितों की रक्षा करेंगे।”

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