इस डील के कुछ ही दिनों बाद भारत सरकार ने अपनी तेल रिफाइनरियों से कहा है कि वे अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने पर लगाए गए 25% के टैरिफ को हटा दिया है। हालांकि, एक कार्यकारी आदेश के अनुसार, अगर भारत रूसी कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं करता है तो यह टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है। भारत सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उनकी खरीद के फैसलों को तय करेगी। वे कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाएंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सबसे अच्छी कीमत पर तेल खरीदेंगे। यही उनकी रणनीति रहेगी।
Russian Oil: रूसी तेल के टैंकर रोकना इतना आसान नहीं होगा, भारत को चुकानी होगी भारी कीमत
क्या कहा है भारत सरकार ने?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी सरकारी तेल रिफाइनरियों को अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की संभावनाओं का मूल्यांकन करने के लिए कहा है। रिफाइनरी के अधिकारियों ने बताया कि कंपनियों को स्पॉट मार्केट की बोलियों में अमेरिकी कच्चे तेल को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। वेनेजुएला के कच्चे तेल के बारे में भी इसी तरह का सुझाव दिया गया है। हालांकि, ऐसी आपूर्ति खुले टेंडरों के बजाय व्यापारियों के साथ निजी बातचीत के माध्यम से की जाएगी।
लेकिन दिक्कतें भी कम नहीं
- अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने में भी कई दिक्कते हैं। ये ऐसी दिक्कतें हैं जो भारत की रिफाइनरियों के लिए अमेरिका या वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति को बड़े पैमाने पर बदलना मुश्किल बना सकती हैं।
- अमेरिकी कच्चा तेल आमतौर पर हल्का और मीठा होता है, जिसका मतलब है कि इसमें सल्फर की मात्रा कम होती है। वहीं, भारत की कई रिफाइनरियां मध्यम-ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए बनाई गई हैं।
- कीमतों का मामला भी फैसलों को प्रभावित करेगा। खासकर लंबी दूरी से तेल भेजने में ज्यादा परिवहन लागत आती है।
- भारतीय रिफाइनरियों के पास पश्चिम अफ्रीका और कजाकिस्तान जैसे क्षेत्रों से अपेक्षाकृत सस्ते विकल्प भी उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों से शिपिंग मार्ग छोटे होने के कारण उन्हें फायदा मिलता है।
कितने तेल आयात की क्षमता?
रिफाइनरी अधिकारियों ने बताया कि भारतीय प्रोसेसर सालाना लगभग 20 मिलियन टन अमेरिकी कच्चा तेल आयात कर सकते हैं। यह लगभग 4,00,000 बैरल प्रतिदिन है। इस स्तर पर भी, आयात पिछले साल की तुलना में ज्यादा होगा। केप्लर के अनुमान के अनुसार, पिछले साल दैनिक खरीद लगभग 2,25,000 बैरल थी।
क्या है सरकार का रुख?
भारत सरकार का कहना है कि वे अपने देश की ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखेंगे। वे कच्चे तेल के लिए अलग-अलग देशों से खरीद करेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सबसे अच्छी कीमत पर तेल खरीदने की कोशिश करेंगे। यही उनकी रणनीति का मुख्य हिस्सा होगा।













