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  • अमेरिका ने ‘दोस्‍त’ पाकिस्तान को 75 देशों की वीजा बैन वाली लिस्ट में डाला, भारत को क्‍यों हाथ नहीं लगाया? जानें

    वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। विदेश विभाग ने 21 जनवरी से 75 देशों के लोगों के लिए इमिग्रेंट वीजा की प्रोसेसिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस लिस्ट में भारत के छह पड़ोसी शामिल हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम भी


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    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
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    वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। विदेश विभाग ने 21 जनवरी से 75 देशों के लोगों के लिए इमिग्रेंट वीजा की प्रोसेसिंग पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस लिस्ट में भारत के छह पड़ोसी शामिल हैं, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम भी है। यह कदम अमेरिकी इमिग्रेशन कानून में सख्ती के तहत जांच प्रक्रियाओं के बड़े पैमाने पर फिर से मूल्यांक का हिस्सा है। पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप की तमाम खुशामद करने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली है। वहीं, इस लिस्ट से भारत को खास तौर बाहर रखा गया है, जिसे नई दिल्ली पर वॉशिंगटन के भरोसे का प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

    पाकिस्तान की बेइज्जती

    हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि रोक के लिए देशों का चयन किस आधार पर किया गया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि रोक में उन देशों को निशाना बनाया गया है जो धोखाधड़ी के लिए हाई रिस्क समझे जाते हैं। बैन में सोमालिया, अफगानिस्तान, यमन, सीरिया और नाइजारिया जैसे देशों के साथ रखा जाना पाकिस्तान के लिए भारी शर्मिंदगी की वजह है। खास बात है कि जिस दिन इसकी घोषणा की गई उसी दिन पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार से जुड़ी क्रिप्टो फर्म के साथ एक समझौता ज्ञापन पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किया था।

    इस लिस्ट में पाकिस्तान का शामिल होना बताता है कि अमेरिकी सरकार आज भी पाकिस्तानी दस्तावेजों की सच्चाई और आपराधिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को लेकर उस पर भरोसा नहीं करती है। CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान रोक अभी केवल इमिग्रेंट वीजा तक ही है, लेकिन ऐसा संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इन 75 देशों के लिए सभी वीजा प्रोसेसिंग पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

    भारत कैसे रहा लिस्ट से बाहर?

    वहीं, इसके ठीक उलट 75 देशों पर वीजा प्रोसेसिंग रोके जाने वाली लिस्ट में भारत का नाम न होना ट्रंप प्रशासन की नजर में नई दिल्ली की भरोसेमंद पार्टनर की स्थिति को मजबूत करता है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि भारत के स्थापित वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल ने नागरिकों को अमेरिकी कार्रवाई से बचाया है।

    एक्सपर्ट इस बात से सहमत है कि भारत को लिस्ट से बाहर रखे जाने का संबंध डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम में अंतर, अमेरिकी इमिग्रेशन स्टैंडर्ड का पालन, आर्थिक संबंध से हो सकता है। इसके साथ ह H-1B जैसे हाई स्किल्ड वीजा कैटेगरी में भारत का दबदबा और अमेरिकी कॉन्सुलर सर्विस के साथ इसका लंबे समय से सहयोग भी बाहर रखे जाने के संभावित कारण हैं।

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