वीजा पर रोक का यह प्लान फ्लोरिडा के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की ओर से 29 जनवरी को पेश किया जाएगा। इसको मंजूरी के साथ ही यह पब्लिक यूनिवर्सिटीज को 2027 की शुरुआत तक H-1B वीजा पर नए फैकल्टी या स्टाफ लाने से रोकेगा। यह कदम गवर्नर रॉन डेसेंटिस के पहले के निर्देश के बाद उठाया गया है। इसने टैलेंट रिक्रूटमेंट और इमिग्रेशन पॉलिसी पर बहस छेड़ दी है।
फ्लोरिडा नए H-1B हायरिंग के लिए क्या प्रस्ताव दे रहा है?
ड्राफ्ट पॉलिसी के तहतफ्लोरिडा की पब्लिक यूनिवर्सिटीज को एक साल तक H-1B वीpe पर नए कर्मचारियों को हायर करने से रोक दिया जाएगा। इससे सीधे तौर पर फॉल 2026 सेमेस्टर के लिए रिक्रूटमेंट प्रभावित होगा। इस रोक के दौरान कैंपस नए H-1B फैकल्टी, रिसर्चर्स या प्रोफेशनल स्टाफ को शामिल नहीं कर पाएंगे।
इस प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि सार्वजनिक रूप से फंडेड यूनिवर्सिटी की नौकरियों में अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका दावा है कि H-1B प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी उम्मीदवारों को दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है। इनका कहना है कि H-1B कर्मचारी अमेरिकियों की नौकरियां छीन रहे हैं।
फ्लोरिडा में विदेशी कर्मचारी
फ्लोरिडा की पब्लिक यूनिवर्सिटी में 400 H-1B कर्मचारी काम करते हैं। वीजा फ्रीज के समर्थकों का तर्क है कि सिस्टम विदेशी हायरिंग पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है। वहीं इसका विरोध करने वालों का कहना है कि स्पेशलाइज्ड एकेडमिक और टेक्निकल भूमिकाओं के लिए इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट की जरूरत होती है।
यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेटर का तर्क है कि अगर इसे मंज़ूरी मिल जाती है तो यह अगले बड़े हायरिंग साइकिल से पहले फ्लोरिडा की पब्लिक यूनिवर्सिटी में स्टाफिंग के फैसलों को प्रभावित करेगा। यह इस बात पर नेशनल बहस को तेज करेगा कि क्या H-1B वीजा प्रोग्राम वर्कफोर्स को मजबूत करता है या घरेलू हायरिंग को कमजोर करता है।














