इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ कर रही थी। शीर्ष न्यायालय ने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों पर विचार किया। सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एन.आई.आई.) के वकील की ओर से राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा कुत्तों को हटाने और सड़कों की उचित बाड़बंदी के संबंध में उठाए गए कदमों की भी सुनवाई की।
पीठ ने कई याचिकाओं पर सुनवाई की
पीठ ने पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई) को पशु आश्रयों या पशु जन्म नियंत्रण सुविधाओं के लिए अनुमति मांगने वाले गैर-सरकारी संगठनों के आवेदनों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने एडब्ल्यूबीआई की ओर से पेश वकील से कहा कि या तो आप आवेदन स्वीकार करें या अस्वीकार करें, लेकिन इसे शीघ्रता से करें।
राज्य सरकार की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
न्यायालय ने संबंधित पक्षों से मामले में यथाशीघ्र अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा। शीर्ष अदालत ने बुधवार को राज्य सरकारों द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी की दर बढ़ाने के निर्देशों का पालन न करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘वे सभी हवाई किले बना रहे हैं।’’ पीठ सात नवंबर, 2025 के उस आदेश में संशोधन का अनुरोध करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारियों को संस्थागत क्षेत्रों और सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।
न्यायालय ने 13 जनवरी को कहा था कि वह राज्यों से कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए ‘‘भारी हर्जाना’देने को कहेगी और ऐसे मामलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराएगी। अदालत ने पिछले पांच वर्षों से आवारा पशुओं से संबंधित मानदंडों के लागू न होने पर भी चिंता जताई।













