नॉर्वे स्थित संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने सोमवार को दावा किया कि ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा से चल रही अशांति में 648 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में नौ नाबालिग भी शामिल हैं। एजेंसी ने कहा है कि इंटरनेट बंद होने की वजह से जमीन की सच्चाई सामने नहीं आ रही है। मरने वालों की संख्या 6,000 तक होने का अंदेशा है। ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों में हताहतों की संख्या नहीं बताई है।
इंटरनेट बंद होने से मुश्किल
IHR ने कहा कि ब्लैकआउट ने प्रदर्शन में मरने वाले लोगों का स्वतंत्र वेरिफिकेशन मुश्किल बना दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि विरोध प्रदर्शन तेज होने के बाद से कम से कम 10,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। IHR डायरेक्टर महमूद अमीरी ने कहा है कि इंटरनेशनल कम्युनिटी को प्रदर्शनकारियों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
प्रदर्शनकारी, ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी और अमेरिका का कहना है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग कर रही है। इससे आम लोगों की जान जा रही है। दूसरी ओर ईरान सरकार का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे इजरायल और अमेरिका हैं। विदेशी ताकतें प्रदर्शनों में हिंसा कराकर स्थिति को बदतर कर रही हैं।
सरकार और प्रदर्शनकारी आमने-सामने
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं। ईरान के लगभग सभी बड़े शहरों में प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों को गद्दार और अमेरिका के टट्टू कह रही है। तेहरान और कई शहरों में खामेनेई के शासन के समर्थन में भी रैलियां हुई हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के प्रदर्शनकारियों की मदद की बात कह रहे हैं। ट्रंप ने इसे ईरान की आजादी का आंदोलन कहा है और इनकी मदद के लिए सैन्य हमले तक की धमकी तेहरान के शासन को दी है। इस पर ईरान ने भी कड़ी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।















