रहमान ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि पिछले कुछ सालों में उन्हें कम काम मिल रहा है और इसका कारण हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ‘पावर शिफ्ट’ है। रहमान ने कहा था कि जो लोग क्रिएटिव नहीं हैं, उनके पास अब फैसले लेने की ताकत है। यह कोई सांप्रदायिक बात भी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें कई प्रोजेक्ट्स के बारे में दूसरों से पता चलता है।
केंद्रीय मंत्री ने रहमान के दावे को बताया झूठा
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने न्यूज एजेंसी से कहा कि एआर रहमान के इस दावे को ‘बिल्कुल झूठा’ बताया है। रहमान की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके करियर में गिरावट होने का धर्म से कोई संबंध नहीं है। एआर रहमान का यह बयान बिल्कुल गलत है कि उन्हें मुस्लिम होने की वजह से फिल्म म्यूजिक इंडस्ट्री में सपोर्ट नहीं मिल रहा है। जी किशन रेड्डी ने इस बात पर जोर दिया कि कंपोजर को सभी समुदायों में बहुत सम्मान मिलता था। देश के लोगों ने रहमान को कभी धर्म की नजर से नहीं देखा।
एक गुट के नेता बन गए हैं रहमान- VHP
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस मामले में अपनी बात रखी, राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कंपोजर पर काम न मिलने की वजह को सांप्रदायिक कारणों से जोड़ने के लिए उन पर हमला किया। रहमान के बयान का जिक्र करते हुए बंसल ने कहा कि ऐसा लगता है कि एआर रहमान भी उस गुट के नेता बन गए हैं, जिसके नेता कभी पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी थे। हामिद अंसारी ने 10 साल तक फायदे उठाए और संवैधानिक पदों पर रहे। लेकिन, रिटायर होते समय उन्होंने भारत को नीचा दिखाया। बंसल ने कहा कि रहमान को पूरे देश में दर्शकों का प्यार मिला है। उन्हें (एआर रहमान) सभी भारतीयों और हिंदुओं ने बहुत पसंद किया। खुद के अंदर झांकने के बजाय, वह सिस्टम की बुराई कर रहे हैं और पूरी इंडस्ट्री को बदनाम कर रहे हैं।
रहमान के डाउनफॉल की एक वजह यह भी
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक एआर रहमान बॉलीवुड में अपने पतन के लिए काफी हद तक खुद ही जिम्मेदार हैं। तमाशा (2015) के बाद बॉलीवुड में उनका काम कुछ खास नहीं रहा है। उसके बाद से उन्होंने कोई ऐसा काम नहीं किया है, जो याद रखे जाने लायक हो। राझणा फिल्म की सफलता के बाद रहमान ने मोहनजो दारो नाम की एक फ्लॉप फिल्म के लिए म्यूजिक दिया। इसके गाने सचमुच एकदम मरे हुए थे, जिसकी बहुत आलोचना हुई। लोगों ने इसे पुराने जमाने का और बिना प्रेरणा वाला बताया। उसी समय, उन्होंने ओके कानमनी के रीमेक ओके जानू के लिए अपने ही काम को रीसायकल किया। संगीत अच्छा था, लेकिन याद रखने लायक नहीं था।













