पिछले 12 महीने में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। बैंकों का कहना है कि गोल्ड लोन में इस उछाल के तीन मुख्य कारण हैं। पहला, बैंक सुरक्षित कर्ज देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दूसरा, सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे लोगों के पास ज्यादा कर्ज लेने की क्षमता आ गई है। तीसरा RBI के निर्देश के बाद कुछ ऐसे रिटेल लोन को अब गोल्ड लोन के तौर पर क्लासीफाई किया जा रहा है।
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गोल्ड और एमएसएमई लोन
बैंक के लोन में बढ़ोतरी का मुख्य कारण गोल्ड लोन और छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को दिए जाने वाले लोन हैं। MSMEs का कुल बकाया लोन लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल लोन का करीब 5% है। लेकिन, नए कर्जों में इनका हिस्सा भी करीब 12% रहा, जिसमें FY26 में 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इन दोनों रुझानों से पता चलता है कि लोग अब सुरक्षित तरीके से व्यक्तिगत कर्ज लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
साथ ही बैंक भी छोटे-छोटे कर्जों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लोन देने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। बड़ी कंपनियां अब बैंकों से कम कर्ज ले रही हैं और बैंक भी बिना गारंटी वाले कर्जों को लेकर थोड़े सतर्क हो गए हैं। इसलिए, बैंकों के लोन देने का तरीका बदल रहा है। नए आंकड़े यह भी बताते हैं कि बड़ी कंपनियों का लोन लेने का रुझान कम हो रहा है। बड़ी कंपनियों का बकाया लोन 28.7 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल लोन का 15% है। लेकिन, नए कर्जों में इनका हिस्सा सिर्फ 3.6% रहा, जिसमें 46,090 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
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होम लोन
यह दिखाता है कि बड़ी कंपनियां या तो अपने पुराने कर्जों को चुका रही हैं या फिर बॉन्ड मार्केट या अपनी कमाई से ही काम चला रही हैं, बजाय बैंक से कर्ज लेने के। कमजोर वर्गों को दिए जाने वाले लोन में भी उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है। ये कुल नए कर्जों का 6% ही रहे, जबकि कुल बकाया लोन में इनका हिस्सा करीब 10% है। व्यक्तिगत कर्जों में भी, होम लोन की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। होम लोन कुल बकाया लोन का 16% है, लेकिन नए कर्जों में इनका हिस्सा सिर्फ 14% रहा।
कुल मिलाकर, व्यक्तिगत लोन ही सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी का जरिया बने हुए हैं, जो कुल नए कर्जों का लगभग 40% हिस्सा दे रहे हैं। सर्विसेज के क्षेत्र में करीब 20% की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें NBFCs और ट्रेड का बड़ा योगदान है। नवंबर 2025 तक, कुल बैंक लोन 195.2 लाख करोड़ रुपये था। यह दिखाता है कि बैंक अब बड़ी कंपनियों के बजाय आम लोगों और छोटे कारोबारियों को ज्यादा लोन दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में इससे बैंकों की कमाई और उनके जोखिम दोनों पर असर पड़ेगा।












