इस साल भारत में शुरू हो सकती है सर्विस
स्टारलिंक की सेवाएं इस साल भारत में भी शुरू हो सकती हैं। कंपनी को पिछले साल भारत सरकार से जरूरी मंजूरियां मिल गई थीं। स्टारलिंक को अब भारत में ग्राउंड स्टेशन और अपना नेटवर्क स्थापित करना है, जिसके बाद यह सर्विस देश में भी शुरू हो जाएगी। शुरुआत में लिमिटेड लोगों को यह सुविधा दी जानी है। धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है। भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश और श्रीलंका में स्टारलिंक की सर्विस उपलब्ध है, हालांकि पाकिस्तान में अभी तक स्टारलिंक को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
डायरेक्ट टु डिवाइस कम्युनिकेशन की तैयारी
स्टारलिंक अब सिर्फ अपनी किट के माध्यम से ही सैटेलाइट इंटरनेट नहीं दे रही, वह डायरेक्ट टु डिवाइस कम्युनिकेशन पर भी काम शुरू कर चुकी है। अमेरिका में टी-मोबाइल के साथ मिलकर कंपनी अंतरिक्ष से सीधे फोन में अपना नेटवर्क उपलब्ध करा रही है। कहा जाता है कि इससे आपात स्थिति में लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने में मदद मिलती है।
कैसे काम करता है स्टारलिंक का नेटवर्क
स्टारलिंक की पैरंट कंपनी स्पेसएक्स के पास पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में हजारों सैटेलाइट्स का बेड़ा है। यह पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए अंतरिक्ष से धरती पर सिग्नल प्रसारित करते हैं। जिस किसी को भी स्टारलिंक का सैटेलाइट इंटरनेट इस्तेमाल करना होता है, उसे किट खरीदनी होती है। मुख्य किट एक छतरी नुमा होती है जिसे खुले आसमान में लगाया जाता है। उस पर अंतरिक्ष से सिग्नल मिलते हैं। वह सिग्नल तार के जरिए घर में लगे राउटर तक पहुंचते हैं और फिर मोबाइल पर वाईफाई के जरिए इंटरनेट चलाया जाता है।
स्टारलिंक पर लगते हैं आरोप
सैटेलाइट इंटरनेट देने वाली स्टारलिंक पर आरोप लगते हैं कि वह अपने नेटवर्क का गलत इस्तेमाल करती है। हाल ही में ईरान में देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन के दौरान लोग वहां स्टारलिंक का इस्तेमाल करते हुए पकड़े गए थे। एलन मस्क ने भी ईरान के लोगों के लिए स्टारलिंक को फ्री कर दिया था













