आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड को बजट के बाद संबोधित करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ‘मैं किसी भी रूपरेखा से परिचित नहीं हूं… ऐसी कोई योजना अभी मौजूद नहीं है। बैंकों का विलय यहां चर्चा का विषय नहीं था, न ही बजट से पहले था। लेकिन अब जो समिति बनाई जा रही है, उसके कार्यक्षेत्र तय होने के बाद, वह भारतीय बैंकिंग को मजबूत बनाने के हर पहलू पर ध्यान देंगी।’
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डिपॉजिट वर्सेज क्रेडिट ग्रोथ
बजट में सीतारमण ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और इसे देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप ढालने के लिए उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस मौके पर रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक बेहतर तरीके से पूंजीकृत हैं और वे अगले चार-पांच साल तक ऋण वृद्धि को संभाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि डिपॉजिट ग्रोथ रेट अब क्रेडिट ग्रोथ के साथ बढ़ रहा है।













