एआई की बढ़ती ताकत
डारियो अमोदेई ने एआई की बढ़ती ताकत को “इंटेलिजेंस के लिए मूर का नियम” (Moore’s Law for intelligence) बताया। उनके मुताबिक
इंसानी दिमाग से तेज – एआई मॉडल अब इतने एडवांस हो रहे हैं कि कुछ ही सालों में वे कई कामों में इंसानों को पीछे छोड़ देंगे।
बड़ा बदलाव – इसे उन्होंने डेटा सेंटर में जीनियसों का देश कहा, यानी एआई एजेंटों का एक ऐसा ग्रुप जो इंसानों से कहीं ज्यादा सक्षम होगा और सुपरह्यूमन स्पीड से काम करेगा।
एंथ्रोपिक ने बेंगलुरू में खोला अपना ऑफिस
एंथ्रोपिक कंपनी अब भारत को अपना प्रमुख केंद्र बना रही है। कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने भारत में अपना ऑफिस खोलने की भी बात कही। कंपनी ने बेंगलुरु में अपना आधिकारिक ऑफिस खोल दिया है और इरीना घोष को भारत का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है, जिनके पास 30 सालों का अनुभव है। वे भारत में कंपनी का कामकाज देखेंगी।
इन्फोसिस से मिलाया हाथ
एंथ्रोपिक ने इन्फोसिस (Infosys) जैसी भारतीय कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है ताकि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस में एआई का इस्तेमाल बढ़ाया जा सके। इस पार्टनरशिप के तहत दोनों कंपनियां मिलकर बैंकिंग और टेलीकॉम सेक्टर के लिए खास एआई टूल्स तैयार करेंगी। इसके साथ ही कंपनी EkStep और Pratham जैसे एनजीओ के साथ मिलकर शिक्षा, खेती और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई मॉडल तैयार कर रही है। साथ ही इनके Claude (क्लॉड) एआई मॉडल को भारतीय भाषाओं के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
जबरदस्त आर्थिक तरक्की
डारियो अमोदेई के मुताबिक भारत एआई के लिए एक परफेक्ट केस स्टडी है। जहां विकसित देशों में एआई से 10% ग्रोथ की उम्मीद है, वहीं भारत में यह 20 से 25% तक पहुंच सकती है। भारत की तकनीकी रूप से सक्षम आबादी नई तकनीक को अपनाने के लिए बहुत उत्सुक है, जो देश की तरक्की में बूस्टर का काम करेगी।
फायदे और जोखिम
अमोदेई ने एआई के दोनों पहलुओं (फायदे और जोखिम) पर बात की।
फायदे – यह लाइलाज बीमारियों का इलाज ढूंढने और करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
जोखिम – उन्होंने आगाह किया कि एआई का गलत इस्तेमाल, नौकरियों पर असर और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी बड़ी हैं। इसलिए उन्होंने न्यू दिल्ली फ्रंटियर एआई के तहत भारत के साथ मिलकर सुरक्षा टेस्टिंग पर काम करने की इच्छा जताई।













