वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं के विभाग की ओर से जारी एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल पेमेंट और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी बढ़ोतरी हुई है। डिजिटल ट्रांजेक्शन लगभग 11 गुना बढ़ गए हैं। कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 80% हो गई है, जिससे यह सबसे मुख्य पेमेंट मीडियम बन गया है। UPI क्यूआर कोड का इस्तेमाल भी 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गया है, जिससे व्यापारी आसानी से इसे अपना पा रहे हैं। फिनटेक और बैंकों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर की संख्या 16 से बढ़कर 38 हो गई है। इससे पूरा सिस्टम और मजबूत हुआ है।
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युवाओं ने बदली तस्वीर
देश में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने में युवाओं की हिस्सेदारी काफी अहम हो रही है। खासकर 18 से 25 साल के युवा यूपीआई को बहुत पसंद करते हैं। इस आयु वर्ग में यूपीआई का इस्तेमाल 66% तक पहुंच गया है। यह दिखाता है कि लोग अब डिजिटल तरीके से पैसों का लेन-देन करने के आदी हो रहे हैं।
यूपीआई की बढ़ती ताकत
- भारत में UPI अब भुगतान का सबसे पसंदीदा तरीका बन गया है। यह कुल भुगतान लेनदेन का 57% हिस्सा है, जो नकदी (38%) से काफी आगे है।
- स्टडी में 65% यूपीआई उपयोगकर्ताओं ने बताया कि वे दिन में कई बार डिजिटल लेन-देन करते हैं।
- मार्च 2021 में जहां यूपीआई प्लेटफॉर्म पर 216 बैंक काम कर रहे थे, वहीं मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 661 हो गई है।
कैश में आई कमी
स्टडी के मुताबिक यूपीआई और RuPay कार्ड का इस्तेमाल करने के बाद 90% लोगों का डिजिटल पेमेंट पर भरोसा बढ़ा है। वहीं, नकदी का इस्तेमाल और ATM से पैसे निकालने में भी कमी आई है। 52% लोगों ने बताया कि उन्हें UPI इस्तेमाल करने के लिए कैशबैक का लालच मिला, जबकि 74% लोगों ने भुगतान की गति को सबसे बड़ा फायदा बताया।
व्यापारी भी हुए दीवाने
यूपीआई के व्यापारी भी दीवाने हो गए हैं। 94% छोटे व्यापारी अब यूपीआई को अपना चुके हैं। लगभग 72% व्यापारी डिजिटल भुगतान से खुश हैं। उन्हें तेज लेन-देन, बेहतर रिकॉर्ड रखने और काम में आसानी जैसी सुविधाएं मिली हैं। 57% व्यापारियों ने तो डिजिटल भुगतान अपनाने के बाद अपनी बिक्री में बढ़ोतरी भी बताई है।













