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  • कैसे तय होता है ट्रेन का किराया? कभी नहीं जान पाएंगे आप पाएंगे आप, रेलवे ने बता दी वजह

    नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि रेलवे का किराया कैसे तय होता है? रेलवे का कहना है कि यह एक ट्रेड सीक्रेट है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय सूचना आयोग यानी सीआईसी ने इस बारे में रेलवे से जानकारी मांगी थी लेकिन रेलवे ने कहा कि पैसेंजर ट्रेनों के अलग-अलग


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    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
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    नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि रेलवे का किराया कैसे तय होता है? रेलवे का कहना है कि यह एक ट्रेड सीक्रेट है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय सूचना आयोग यानी सीआईसी ने इस बारे में रेलवे से जानकारी मांगी थी लेकिन रेलवे ने कहा कि पैसेंजर ट्रेनों के अलग-अलग क्लास के किराए तय करने का तरीका और उसका क्लासिफिकेशन ट्रेड सीक्रेट/बौद्धिक संपदा अधिकार के दायरे में आता है। इसलिए, राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) एक्ट के तहत यह जानकारी नहीं दी जा सकती।

    टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक CIC ने एक ऐसी अर्जी खारिज कर दी जिसमें ट्रेन टिकट के बेस फेयर की गणना के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इस अर्जी में डायनामिक प्राइसिंग और तत्काल बुकिंग के असर के बारे में भी पूछा गया था। यह ऑनलाइन अर्जी 25 जनवरी 2024 को डाली गई थी। इसमें रेलवे से यह बताने को कहा गया था कि टिकट के बेस फेयर की गणना में कौन-कौन से हिस्से, पैरामीटर, डायनामिक प्राइसिंग के तरीके, मौसम के हिसाब से बदलाव या अन्य कौन से कारक शामिल होते हैं।

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    जानकारी देने की बाध्यता नहीं

    रेलवे बोर्ड के सेंट्रल पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (CPIO) ने अपने जवाब में कहा कि किराया क्लास के हिसाब से लिया जाता है। अलग-अलग क्लास के किराए में जो अंतर होता है, वह उनमें दी जाने वाली सुविधाओं पर आधारित होता है। CPIO ने कहा, “जहां तक अलग-अलग क्लास के किराए के वर्गीकरण और तय करने की पद्धति का सवाल है, यह नीतिगत तरीका ट्रेड सीक्रेट/बौद्धिक संपदा अधिकार के दायरे में आता है और इसलिए, जनहित में इसका खुलासा करना उचित नहीं समझा जाता है।”

    CPIO ने यह भी बताया कि RTI एक्ट की धारा 8(i)(d) के तहत ऐसी जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि CIC ने अपने पिछले आदेशों में भी इस बात को माना है और दोहराया है। RTI एक्ट की धारा 8 में उन जानकारियों की सूची है जिन्हें कानून में छूट दी गई है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, ट्रेड सीक्रेट और व्यक्तिगत गोपनीयता जैसी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है।

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    सामाजिक दायित्व

    रेलवे ने कहा कि भारतीय रेलवे एक कमर्शियल यूटिलिटी के तौर पर चलाई जाती है और साथ ही यह सरकार का एक अंग होने के नाते राष्ट्रीय हित में विभिन्न सामाजिक दायित्वों को निभाने के लिए भी बाध्य है। कमीशन ने यह भी नोट किया कि पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर ने पहले ही वह सारी जानकारी दे दी थी जो सार्वजनिक की जा सकती थी। साथ ही रेलवे की रेटिंग नीतियों के सामान्य सिद्धांत भी बताए थे।

    कमीशन ने पाया कि उपलब्ध रेकॉर्ड से परे जाकर कोई नया डेटा बनाने या उसकी व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं थी। अपीलकर्ता की सुनवाई के दौरान अनुपस्थिति को देखते हुए और जवाब में कोई कमी न पाते हुए, सूचना आयुक्त स्वागत दास ने कहा कि किसी और हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और उन्होंने अपील को निपटा दिया।

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