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  • क्रिप्टो पर नजर रखना बहुत मुश्किल! RBI के बाद अब इनकम टैक्स विभाग ने भी किए हाथ खड़े

    नई दिल्ली: इनकम टैक्स विभाग ने भी क्रिप्टोकरंसी जैसे वर्चुअल डिजिटल असेट्स (VDA) से जुड़े बड़े खतरों की ओर इशारा किया है। रिजर्व बैंक (RBI) की तरह टैक्स विभाग ने भी भारत में इन करंसी की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। Azad Hind के मुताबिक, संसद की फाइनैंस कमिटी के सामने एक प्रेजेंटेशन देते


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली: इनकम टैक्स विभाग ने भी क्रिप्टोकरंसी जैसे वर्चुअल डिजिटल असेट्स (VDA) से जुड़े बड़े खतरों की ओर इशारा किया है। रिजर्व बैंक (RBI) की तरह टैक्स विभाग ने भी भारत में इन करंसी की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। Azad Hind के मुताबिक, संसद की फाइनैंस कमिटी के सामने एक प्रेजेंटेशन देते हुए टैक्स अधिकारियों ने बताया कि क्रिप्टो के जरिए बिना किसी बैंक या सरकारी बिचौलिए के तुरंत पैसे एक से दूसरी जगह भेजे जा सकते हैं। इसमें पहचान छिपी रहती है और सरहदों की कोई पाबंदी नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने बताया कि इसी वजह से इस पूरे सिस्टम पर नजर रखना बहुत मुश्किल है।

    इसके अलावा, विदेशी एक्सचेंज, प्राइवेट डिजिटल वॉलेट और डीसेंट्रलाइज्ड प्लैटफॉर्म्स की वजह से अधिकारियों के लिए यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि टैक्स के दायरे में आने वाली कमाई कितनी है। इसमें असली मालिक की पहचान आसानी से नहीं हो पाती, जिससे पूरी संपत्ति और लेनदेन पारदर्शी नहीं रहते। टैक्स विभाग ने विदेशी क्रिप्टो ट्रांजेक्शन में आने वाली कानूनी दिक्कतों का भी जिक्र किया। चूंकि इसमें कई देश शामिल हो सकते हैं, इसलिए पैसों के लेनदेन की जांच करना और बकाया टैक्स वसूलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

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    हिसाब-किताब लगाना मुश्किल

    हालांकि, पिछले कुछ महीनों में देशों के बीच जानकारी साझा करने की कोशिशें हुई हैं। लेकिन टैक्स अधिकारियों के लिए अब भी लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना और सही हिसाब-किताब लगाना बहुत मुश्किल बना हुआ है। भारत उन देशों में शामिल है, जो भारी दबाव और लॉबिंग के बावजूद क्रिप्टोकरंसी को मंजूरी देने से कतरा रहे हैं। जांच एजेंसियां भी इस बात से डरी हुई हैं कि इनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के लिए किया जा सकता है।

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