24 घंटे पहले बुधवार शाम 4:30 बजे क्रिप्टो का ग्लोबल मार्केट कैप 3.16 ट्रिलियन डॉलर था। गुरुवार शाम 4:30 बजे यह करीब 2.36 फीसदी की गिरावट के साथ 3.09 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया। ऐसे में क्रिप्टो निवेशकों के 24 घंटे में करीब 6.30 लाख करोड़ रुपये डूब गए। क्रिप्टो मार्केट में गिरावट के कारण बिटकॉइन की कीमत फिर से 90 हजार डॉलर से नीचे आ गई है। हाल में इसमें कई दिनों बाद 90 हजार डॉलर का आंकड़ा पार किया था।
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कहां पहुंची बिटकॉइन की कीमत
क्रिप्टो मार्केट में गिरावट का असर दुनिया की सबसे महंगी क्रिप्टो बिटकॉइन पर भी पड़ा। 24 घंटे में बिटकॉइन की कीमत में दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। इस गिरावट के साथ इसकी कीमत फिर से 90 हजार डॉलर के नीचे निकल गई। हालांकि बाद में इसमें कुछ तेजी आई और यह फिर से 90 हजार के पार निकल गई।
बाकी क्रिप्टो का क्या हाल?
गुरुवार को सिर्फ बिटकॉइन में ही नहीं, बल्कि दूसरी कई क्रिप्टो में भी बड़ी गिरावट आई। इथेरियम 3 फीसदी की गिरावट के साथ 3110 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। वहीं रिपल में 7 फीसदी से ज्यादा, बाइनेंस में करीब 3 फीसदी, सोलाना में दो फीसदी से ज्यादा, डॉगकॉइन क्रिप्टो में 5 फीसदी से ज्यादा और कार्डानो 6 फीसदी से ज्यादा गिर गईं।
क्यों आई गिरावट?
क्रिप्टो मार्केट में गिरावट का सबसे बड़ा कारण मुनाफावसूली को माना जा रहा है। वहीं वेनेजुएला इफेक्ट भी क्रिप्टो मार्केट पर पड़ा है। वजीरएक्स (WazirX) के फाउंडर निश्चल शेट्टी ने बताया कि पिछले 24 घंटों में क्रिप्टो बाजार एक ठहराव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया है। इससे सभी तरह की संपत्तियों में जोखिम लेने की इच्छा कम हुई है।












