भगवान को गुरु बनाने की सरल विधि
आंखें बंद करके आराम से सुखासन में बैठ जायें, भगवान से अन्तर्मन में कहें, ‘हे भगवान, मैं आपको अपना गुरु बनने का आग्रह कर रहा हूं, आप मुझे शिष्य के रूप में स्वीकार करें। दोनों ऊपर हाथ उठाकर ब्रह्मांड की तरफ देखते हुए नौ बार घोषणा करें और कहें, ‘अखिल ब्रह्माण्ड में मैं (अपना नाम और गोत्र का उच्चारण करके कहें) यह घोषणा करता/करती हूं कि अमुक भगवान आज से मेरे गुरु हैं, मै उनका शिष्य हूं।’ इस प्रकार जिस भगवान को गुरु बनाना चाहते हैं, उनका नाम नौ बार लेकर कहें कि वे आपके गुरु हैं। जैसे अगर आप भगवान शिव को गुरु बनाना चाहते हैं तो संकल्प पूर्वक कहें कि, ‘शिव मेरे गुरु हैं, मैं उनका शिष्य हूं, शिव मेरे गुरु हैं मै उनका शिष्य हूँ,’ इस प्रकार नौ बार कहें। आपने जिस भी देवी अथवा देवता को अपना गुरु बनाया है, उनसे प्रतिदिन निवेदन करें कि, ‘हे प्रभु आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया करें, मेरा कल्याण करें और मुझे सही तथा गलत का भेद करने तथा सही गलत में अन्तर समझने की सद्बुद्धि प्रदान करें।’
जब हम अन्तर्मन से अपने इष्ट को अपना गुरु बनाते हैं तो इष्ट की शक्ति हमारे अन्तर्मन में जागृत हो जाती है, जिसके प्रभाव से जीवन की राह में आने वाली बाधाओं का शमन होने लगता है। बाधा दूर होने से व्यक्ति शीघ्र ही प्रगति के पथ पर बढ़कर समाज में नाम-सम्मान, सुख-शांति प्राप्त करता है।
आप किसी मानव तनधारी को भी अपना गुरु बना सकते हैं, जिस पर आप पूर्ण श्रद्धा-विश्वास रखते हों, जिसकी कही हुई बात का अनादर कभी न करें, यानि गुरु का वाक्य शिष्य के लिए आदेश होता है। जब शिष्य अर्जुन की तरह कृष्ण को कुरुक्षेत्र में गुरु बनाकर बिना तर्क-वितर्क किए गुरु की बात को शत-प्रतिशत मानता है, तो महाभारत जैसे संग्राम में शिष्य विजय का परचम फहराता है।
गुरु बनाने के बाद उसी दिन से जीवन बदलने लगता है। गुरु को साक्षी बनाकर शुरु किये कार्यों में रुकावटें नही आतीं, इसलिये जो भी काम करें उसके लिये गुरु को पहले साक्षी बना लें और कहें, ‘हे गुरुदेव मैं आपका शिष्य हूं, आपको साक्षी बनाकर ये कार्य करने जा रहा हूं, कार्य की इसकी सफलता के लिए आप मुझे दैवीय सहायता और सुरक्षा प्रदान करें।’














