एनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को लेकर चिंता जताई है। ट्रंप को लगता है कि आर्कटिक में कनाडा की स्थिति अमेरिका के दुश्मनों, खासतौर से चीन और रूस के सामने कमजोर है। ऐसे में वह कनाडा में सुरक्षा के मामले में कुछ बदलाव चाहते हैं। यह ऐसे समय हो रहा है, जब पहले से ही ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमरिका और यूरोप में ठनी हुई है। अमेरिका की ओर से कोई दखल दोनों देशों में तनाव बढ़ा सकती है।
ट्रंप को रूस-चीन का डर
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने रूस और चीन की घुसपैठ का डर जताते हुए कनाडा की उत्तरी सीमाओं की रक्षा करने की क्षमता पर निराशा जताई है। ट्रंप ने निजी तौर पर तर्क दिया है कि कनाडा को अपने रक्षा खर्च में काफी बढ़ोतरी करने की जरूरत है। इसने ट्रंप प्रशासन के भीतर आर्कटिक रणनीति पर विमर्श को तेज कर दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि वह कनाडा की उत्तरी सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने को लेकर काम कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने पर चर्चा नहीं हुई है। ग्रीनलैंड की तरह कनाडा पर सैन्य कार्रवाई या खरीद की बात भी कनाडा के लिए अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है।
कनाडा पर सैन्य हमला नहीं
रिपोर्ट कहती है कि फिलहाल जिस विचार पर सबसे मजबूती से विचार किया जा रहा है, वह कनाडा के साथ एक समझौता है। समझौते का मकसद कनाडा की उत्तरी सीमा को मजबूत करना है। कनाडा की ओर से अभी इस पर कोई रिएक्शन नहीं आया है, जिसने हाल ही में चीन से संबंध बेहतर करने पर जोर दिया है।
कनाडा में रूस-चीन के खिलाफ सुरक्षा मजबूत करने की यह पहल ट्रंप के बड़े ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ का हिस्सा है। इसमें पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभाव को बढ़ाने की एक रणनीति है। अमेरिकी अफसरों का यह भी कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप पहले की तरह कनाडा को अमेरिकी राज्य बनाने की बात फिलहाल नहीं कर रहे हैं।













