यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने 23 दिसंबर को चीन के सैन्य और सुरक्षा विकास पर साल 2025 की रिपोर्ट जारी की है। इसमें DF-17 की तैनाती का दावा किया गया है। DF-27 की क्षमताओं की आधिकारिक तौर पर पहली बार पुष्टि करते हुए PLA की तैनात पारंपरिक स्ट्राइक क्षमता दिखाई गई। इसका मतलब है कि DF-27 हवाई या अलास्का जैसे अमेरिका के मुख्य भूभाग में भी लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है।
कितनी ताकतवर है DF-27
DF-27 मिसाइल 5,000 से 8,000 किलोमीटर दूर तक जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला कर सकती है। DF-27 की तैनाती के साथ चीनी सेना के पास लगभग पूरे इंडो-पैसिफिक को कवर करने और अमेरिकी प्रशांत फ्रंटलाइन क्षेत्रों पर हमला करने की क्षमता हो जाती है। इनका इस्तेमाल टकराव की स्थिति में बीजिंग के खिलाफ हमले करने के लिए लॉन्चपैड के रूप में किया जा सकता है।
चीन की इस मिसाइल की रेंज ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने की है, जो दक्षिण प्रशांत में अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है। पेंटागन के आकलन में कहा गया है कि इस अपनी तरह के पहले एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की तैनाती से चीन अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर अपनी मौजूदा क्रूज, सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों की रेंज से ज्यादा दूरी से हमला कर पाएगा।
अमेरिका की चिंता
अमेरिका की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई हैं क्योंकि ताइवान के मुद्दे पर उसे चीन से तनातनी बढ़ने का डर है। वहीं उसके लिए DF-27 चीनी सेना का गुप्त रहस्य बना हुआ है। DF-27 के बारे में ज्यादातर जानकारी लीक हुई इंटेलिजेंस और पेंटागन के आकलन से मिली है। इस मिसाइल का खुलासा पहली बार पेंटागन की 2021 की रिपोर्ट में किया गया था, जिसमें इसे एक लंबी दूरी का हथियार बताया गया था।
हाल ही में DF-27 के बारे में बात करते हुए,US नेवल वॉर कॉलेज के चाइना मैरीटाइम स्टडीज इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर एंड्रयू एरिक्सन ने कहा है कि चीन ऐसी क्षमता वाला पहला देश बन गया है। एक पारंपरिक ICBM में ASBM वेरिएंट भी है जो इंटरकॉन्टिनेंटल दूरी तक तेजी से सटीक हमले कर सकता है।
DF-27 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) के साथ आता है, तो अमेरिकी हवाई सुरक्षा के लिए इसे रोकना बहुत मुश्किल होगा। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के उलट HGV अपनी ज्यादातर उड़ान के दौरान ग्लाइड और पैंतरेबाजी करते हैं। DF-27 का इस्तेमाल डिस्ट्रॉयर, आने वाले बैटलशिप और एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे भारी नौसैनिक जहाजों को आसान निशाना बना सकता है।













