चीन एक सामान्य वैज्ञानिक रिसर्च के लिए जहाजों को नहीं भेजता है। बल्कि इसके पीछे रणनीतिक कारण और जासूसी होता है। वो हिंद महासागर का मानचित्रण कर रहा है। हिंद महासागर में चप्पे-चप्पे पर क्या है, उसकी जानकारी जुटा रहा है।
दा यांग हाओ रिसर्च जहाज की क्षमताएं क्या हैं?
दा यांग हाओ, चीन के सबसे एडवांस जासूसी जहाजों में शामिल है। ये एक अत्याधुनिक महासागर सर्वेक्षण जहाज है। ये AUV यानि ऑटोनोमस अंडरवाटर व्हीकल से लैस रहता है, जो छोटी मानवरहित पनडुब्बियां होती हैं। ये समंदर के अंदर 6000 मीटर की गहराई तक जा सकती हैं और रिसर्च कर सकती हैं। यह समुद्र के नीचे की जमीन का हाई-रिजॉल्यूशन नक्शा बना सकता है। इसमें उन्नत सोनार और ऐसे उपकरण लगे हैं जो समुद्री पानी की लवणता, तापमान और गहराई में ध्वनि की गति को मापने का काम करते हैं। इसका फायदा चीन को उस वक्त हो सकता है जब युद्ध छिड़ने की आशंका हो। उसके पास पहले से ही हिंद महासागर की जानकारियां होंगी और वो अपनी पनडुब्बियों को उस हिसाब से ऑपरेट कर सकता है।
हिंद महासागर में पहुंचने का मकसद क्या हो सकता है?
चीन हर बार जब हिंद महासागर में अपने जासूसी जहाजों को भेजता है तो वो इसके पीछे वैज्ञानिक शोध को वजह बताता है। वो खनिज की खोज करने की भी बात करता है। दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में चीन के पास ‘पॉलीमेटालिक सल्फाइड’ की खोज के लिए लाइसेंस है। जहाज का लक्ष्य इन संसाधनों का पता लगाना भी हो सकता है। मालदीव में चीन समर्थक सरकार होने की वजह से वहां इन जहाजों को पोर्ट एक्सेस आसानी से मिल रहा है।
भारत के लिए चिंता की बात क्या हो सकती है?
चीन के ये रिसर्च जहाज गहरे समंदर के नीच कई तरह का डेटा हासिल करते हैं, जैसे तापमान, घनत्व और सटीक नक्शा। इससे चीनी पनडुब्बियों के लिए हिंद महासागर के रास्तों को सुरक्षित बनाने में मदद मिलती है। इससे उन्हें भारतीय और अमेरिकी रडार से बचने में भी आसानी होती है। इसके अलावा अक्सर देखा गया है कि जब भारत ओडिशा तट से अपनी मिसाइलों का परीक्षण करने के लिए नोटम जारी करता है तो ऐसे चीनी जहाज आसपास मंडराने लगते हैं ताकि वे डेटा इंटरसेप्ट कर सकें। अक्टूबर 2025 से अब तक चीन अपने 6 जासूसी जहाजों को हिंद महासागर में भेज चुका है, जिससे पता चलता है कि वो इस क्षेत्र में कितनी आक्रामकता के साथ पांव फैलने की कोशिश कर रहा है।
नवभारत टाइम्स ने नौसेना एक्सपर्ट्स से जानने की कोशिश की अमूमन जब चीनी जहाज पहुंचते हैं तो भारत की प्रतिक्रिया किस तरह की होती है तो उनका कहना था कि भारतीय नौसेना ऐसे चीनी जहाजों पर हर एक सेकंड नजर रखती हैं। भारतीय नौसेना और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां (IMAC) चीन के इस रिसर्च जहाज की हर मूवमेंट पर सैटेलाइट से नजर रख रही होंगी।













