इजराइली पार्लियामेंट नेसेट में अपने भाषण में मोदी ने कहा, ‘आज की अनिश्चित दुनिया में, भारत और इजराइल जैसे भरोसेमंद पार्टनर्स के बीच एक मजबूत डिफेंस पार्टनरशिप बहुत जरूरी है।’ इजराइल के लोकल मीडिया के मुताबिक, MoU के रूप में लेटेस्ट भारत-इजराइल डिफेंस कोऑपरेशन के दो पहलू हो सकते हैं- डिफेंसिव सिस्टम के लिए टाई-अप और अटैकिंग वेपन के लिए कोलेबोरेशन।
इन खतरनाक हथियारों और टेक्नोलॉजी पर भारत का फोकस
- डिफेंस डील के तहत इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम, राफेल के डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम और राफेल और एल्बिट के आयरन बीम पर फोकस होने की उम्मीद है। हालांकि, ये सभी इजराइली कंपनियां होने वाली डील्स के बारे में चुप हैं।
- इसके अलावा, राफेल के SPICE 1000 गाइडेंस किट, एल्बिट सिस्टम्स की रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों, आइस ब्रेकर नेवल क्रूज मिसाइलों और IAI की सुपरसोनिक एयर LORA मिसाइलों के लिए एग्रीमेंट्स होने की उम्मीद है और कुछ मामलों में तो साइन भी हो चुके हैं।
- भारत इन हथियारों को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत बनाने के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करना चाहता है ताकि 2035 तक पूरे भारत में बनने वाले मल्टी-लेयर्ड शील्ड के लिए इन्हें अपने आने वाले ‘सुदर्शन चक्र’ में शामिल किया जा सके।
- गोल्डन होराइजन को खरीदने पर बातचीत हो सकती है, जिसे स्पैरो टारगेट मिसाइल फैमिली का अगला मॉडल माना जा रहा है। गोल्डन होराइजन हथियारों की एक दुर्लभ क्लास है जिसे हवाई जहाज से छोड़े जाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसलिए इस मिसाइल को आसानी से भारतीय वायुसेना के सुखोई-30एमकेआई जेट विमानों के साथ अटैच किया जा सकता है।
- 1,000-2,000 किमी की मारक क्षमता और मैक 5 तक की गति वाली इस मिसाइल प्रणाली को भूमिगत बंकरों, कठोर सैन्य प्रतिष्ठानों और यहां तक कि परमाणु सुविधाओं को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसी गति पर, मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों के साथ इस मिसाइल को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह इसे भारत की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से काफी तेज बनाता है, जो मैक 3 की गति से यात्रा करती है और इसे व्यापक रूप से दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है।














