भारत ने 2009 में आठ P-8I पोसाइडन के लिए पहला ऑर्डर साइन किया था। इसके बाद 2016 में चार पोसाइडन के लिए ऑर्डर दिया। हालिया छह पोसाइडन के ऑर्डर के साथ अमेरिका के बाद भारत पोसाइडन का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बनने जा रहा है। इसके चीन और अमेरिका की इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी पर गंभीर असर हो सकते हैं। पोसाइडन चीन के लिए सिरदर्द बन रहा है।
पोसाइडन की इंडो-पैसिफिक सफलता
बोइंग के मुताबिक, अभी नौ देशों में 200 P-8 सर्विस में हैं या कॉन्ट्रैक्ट पर हैं। जून 2025 तक 169 P-8 अलग-अलग देशों को डिलीवर किए जा चुके हैं। अमेरिका के अलावा आठ और देश पोसाइडन ऑपरेट करते हैं। इन आठ में से चार देश इंडो-पैसिफिक में हैं। ये देश- इंडिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और साउथ कोरिया हैं।
भारत के पास 12 पोसाइडन का बेड़ा है और छह का ऑर्डर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के पास 12 पोसाइडन का बेड़ा है और उसने दो और ऑर्डर किए हैं। इसके अलावा न्यूजीलैंड के पास चार और साउथ कोरियन नेवी के पास छह पोसाइडन हैं। इन चार देशों के पास 42 पोसाइडन होने जा रहे हैं। अमेरिकी पोसाइडन भी इंडो-पैसिफिक में तैनात हैं।
चीन मानता है खतरा
चीन इस एयरक्राफ्ट को अपने सबमरीन ऑपरेशन के लिए खतरा मानता है। साल 2024 में बीजिंग ने अमेरिका पर विवादित साउथ चाइना सी में सबमरीन-हंटिंग P-8A पोसाइडन तैनात करने का दावा किया था। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने साउथ चाइना सी और ताइवान स्ट्रेट जैसे बीजिंग के दावे वाले इलाकों में पोसाइडन तैनात करके चीन को परेशान किया है।
भारत ने भी चीनी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए एयरक्राफ्ट तैनात किया है। अपनी समुद्री भूमिका के अलावा P-8I का इस्तेमाल जमीन पर इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR) मिशन के लिए किया गया है। खासतौर से 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और हिमालय में 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान चीन पर नजर रखने के लिए इसका इस्तेमाल हुआ।
P-8 पोसाइडन की विशेषता
P-8 का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल क्वाड देशों के साथ-साथ साउथ कोरिया और न्यूजीलैंड जैसे दूसरे ऑपरेटरों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा। इससे वे एक नेटवर्क वाला डिफेंस सिस्टम बना पाएंगे, जो रियल-टाइम ISR डेटा शेयर करेगा। इसका मुकाबला करने में चीन को अपने लिमिटेड अलायंस की वजह से मुश्किल होगी।
बोइंग डिफेंस स्पेस एंड सिक्योरिटी ने P-8 पोसाइडन को डेवलप किया है। बोइंग P-8 एक वर्सेटाइल समुद्री पेट्रोल एयरक्राफ्ट है, जो एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, एंटी-सरफेस वॉरफेयर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही के साथ-साथ सर्च-एंड-रेस्क्यू मिशन में बेहद उपयोगी है। P-8I का इस्तेमाल कोस्टल पेट्रोलिंग के लिए किया जाता है।
लंबी दूरी की पेट्रोलिंग में कारगर
इस एयरक्राफ्ट की मैक्सिमम रेंज 1200 नॉटिकल मील है और यह 10 घंटे तक चल सकता है। इससे यह एयरक्राफ्ट हिंद महासागर या साउथ चाइना सी जैसे इलाकों में लंबी दूरी की पेट्रोलिंग कर सकता है। इसमें मॉडर्न सर्विलांस और टोही इक्विपमेंट हैं। इसमें एक लंबी दूरी का X-बैंड रडार शामिल है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर समुद्री चीजों का पता लगा सकता है।
पोसाइडन में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर हैं। इसके अलावा इस एयरक्राफ्ट में AN/APY-10 मल्टी-मोड रडार है, जिसमें सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) और इनवर्स कैपेबिलिटी हैं। यह हर मौसम में सबमरीन, सरफेस वेसल और लैंड टारगेट का पता लगा सकती है।
मिसाइलों से लैस है एयक्राफ्ट
इस एयरक्राफ्ट की एक अहम खासियत मैग्नेटिक डिस्टर्बेंस की पहचान करके पानी में डूबी सबमरीन का पता लगाना है। यह चीन के बढ़ते सबमरीन फ्लीट को ट्रैक करने के लिए बहुत जरूरी है। यह एयरक्राफ्ट दुश्मन की सबमरीन एक्टिविटी का पता लगाने और उसे ट्रैक करने के लिए 120 से ज्यादा सोनोबॉय भी ले जा सकता है।
P-8A समुद्री खतरों पर सटीक निशाना लगाने के लिए एयर-टू-सरफेस मिसाइलों और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए टॉरपीडो से लैस है। हाई-एल्टीट्यूड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर वेपन कैपेबिलिटी के साथ P-8A 30,000 फीट की ऊंचाई से ग्लाइड बम के तौर पर MK-54 टॉरपीडो तैनात करके सबमरीन पर हमला कर सकता है।
विवादित इलाकों में बढ़ती है अहमियत
यह एयरक्राफ्ट विवादित इलाकों और मलक्का स्ट्रेट जैसे चोक पॉइंट पर नजर रखने में उपयोगी है। यह चीनी समुद्री मूवमेंट पर कड़ी नजर रखने का काम करत है। P-8A को मुश्किल समुद्री माहौल के लिए बनाया गया है। इसे मुश्किल हालात में 25 साल या 25,000 घंटे तक उड़ान के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें नए सेंसर, हथियार या मिशन सिस्टम अपग्रेड किया जा सकते हैं।













