बीएनपी उम्मीदवार को समर्थन देते हुए हिफाजत अमीर ने कहा कि मेरे लिए यह चुनाव नहीं है। यह जमात के खिलाफ जिहाद है। उन्होंने बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी पर इस्लाम की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस झूठी ताकत को बढ़ने से रोकने के लिए हमें एकजुट होना होगा और चेतावनी दी कि अगर जमात सत्ता में आई तो इस्लाम और मुसलमानों का नुकसान होगा।
जमात को बताया इस्लाम के लिए खतरा
बाबूनगरी ने कहा कि अगर वे (जमात) सत्ता में आते है, तो वे इस्लाम को जड़ से उखाड़ देंगे और मुसलमानों की बुनियाद को ही खत्म कर देंगे। वे ऐसा समूह हैं जो लोगों का गला काटते हैं। मुहीबुल्लाह पहले भी कई मौकों पर जमात-ए-इस्लामी की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। कुछ महीने पहले ही उन्होंने जमात-ए-इस्लामी को एक पाखंडी इस्लामिक पार्टी कहा था। बीते साल अगस्त में हिफाजत नेता ने कहा था कि ‘जमात-ए-इस्लामी एक पाखंडी इस्लामिक पार्टी है। जमात-ए-इस्लामी मौदूदी के इस्लाम को मानती है, जबकि हम मदीना के इस्लाम को मानते हैं।’
बांग्लादेश चुनाव पर क्या कहते हैं सर्वे?
हालिया सर्वेक्षणों से पता चलता है कि इस बार आम चुनाव में जमात-ए-इस्लामी पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभर सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक जमात इस बार सबसे आगे चल रही तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी को कड़ी टक्कर दे रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों की हमारी स्टडी बताती है कि हालिया चुनाव अभियान के दौरान तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP ने हिफाजत के साथ संपर्क बढ़ा दिया है।













