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  • जापान के पास इतना प्लूटोनियम की रातों रात बना ले परमाणु बम, चीन का बड़ा दावा, क्या हिरोश‍िमा को भूल गया?

    टोक्यो: दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोश‍िमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे। उसके बाद जापान ने प्रण लिया था कि वो अपनी सेना नहीं रखेगा। कई दशक बीतने के बाद अब जापान ना सिर्फ अपनी सेना बना रहा है, बल्कि चीन ने दावा किया है कि जापान, गुप्त तरीके


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    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
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    टोक्यो: दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोश‍िमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे। उसके बाद जापान ने प्रण लिया था कि वो अपनी सेना नहीं रखेगा। कई दशक बीतने के बाद अब जापान ना सिर्फ अपनी सेना बना रहा है, बल्कि चीन ने दावा किया है कि जापान, गुप्त तरीके से परमाणु बम का निर्माण कर रहा है। हालांकि परमाणु हथियारों को लेकर जापान का हमेशा से सख्त रूख रहा है और उसने फरवरी 1970 में क्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) पर साइन कर दिए थे। इसके अलावा जापान तीन नॉन-न्यूक्लियर सिद्धांतों का भी पालन करता है। ये तीन सिद्धांत हैं 1- न्यूक्लियर हथियार न रखना, 2- न्यूक्लियर हथियार ना बनाना, 3- जापानी इलाके में न्यूक्लियर हथियारों को आने की इजाज़त न देना। जापान का ये सिद्धांत एतिहासिक था, लेकिन नये जियो-पॉलिटिकल हालातों और चीन के बढ़ते खतरों ने जापान को परमाणु हथियार बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।

    जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पिछले दिनों कहा था कि चीन अगर ताइवान पर सशस्त्र हमला करता है, तो इससे जापान के लिए “अस्तित्व का खतरा” पैदा हो सकता है, जिससे ऐसे हालात में जापानी सेना की जवाबी कार्रवाई की संभावना खुल जाती है। चीन के अलावा जापान को उत्तर कोरिया के हमले की भी आशंका रहती है, जिसके पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट है कि जापान ने चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों के खतरों को देखते हुए दूसरे देशों को जानलेवा हथियार एक्सपोर्ट करने पर खुद लगाई गई पाबंदियों में ढील दी है। 2022 में जापान ने नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी को अपनाया था, जिसके तहत उसने लंबी दूरी की स्ट्राइक कैपेबिलिटी हासिल करने पर लगाई गई खुद की पाबंदी को काफी कर दिया था। जिसके बाद अब जापान, लंबी दूरी की मिसाइलों का निर्माण कर रहा है।

    क्या जापान चोरी से बना रहा परमाणु बम?
    चीन ने इस हफ्ते की शुरूआत में 30 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें उसने इंटरनेशनल कम्युनिटी से जापान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ ‘ठोस और कड़े कदम उठाने’ की अपील की है। चीन के रिपोर्ट में कहा गया है कि “जापान ने शायद पहले ही गुपचुप तरीके से हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम बना लिया है और उसके पास कम समय में न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की टेक्नोलॉजिकल और आर्थिक क्षमताएं हैं।” इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की एक टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है कि जापान के पास “लगभग रातों-रात” न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता है। बाइडेन ने यह जानकारी सबसे पहले जून 2016 में अमेरिकी पब्लिक ब्रॉडकास्टर PBS को दिए एक इंटरव्यू में दी थी।

    शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए बाइडेन ने कहा था कि “क्या होगा अगर जापान, जो कल न्यूक्लियर पावर बन सकता है, कल ही न्यूक्लियर हथियार बना ले? उनके पास लगभग रातों-रात ऐसा करने की क्षमता है।” चीन ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसका शीर्षक “जापान के दक्षिणपंथी ताकतों की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएं: विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा” नाम से है, जो करीब 30 पन्नों का है। यह रिपोर्ट चाइना आर्म्स कंट्रोल एंड डिसआर्मामेंट एसोसिएशन (CACDA) और न्यूक्लियर स्ट्रेटेजिक प्लानिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, जो चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन से जुड़ा एक थिंक टैंक है, उसने मिलकर तैयार किया है। इस डील में कहा गया है कि NPT संधि के तहत जापान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं, कि वो परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं करेगा, लेकिन उसने गुपचुप तरीके से न्यूक्लियर हथियारों पर रिसर्च और डेवलपमेंट किया है।

    चीन की रिपोर्ट में जापान की न्यूक्लियर क्षमता पर क्या है?
    रिपोर्ट में कहा गया है, “जापान ने चोरी छिपे दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से एक व्यापक न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल सिस्टम स्थापित किया है और उसके पास मजबूत न्यूक्लियर औद्योगिक क्षमताएं हैं।” रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि “जापान के पास हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम बनाने की क्षमता है, जो न्यूक्लियर बम बनाने के लिए एक जरूरी मैटेरियल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान NPT के तहत एकमात्र ऐसा गैर-न्यूक्लियर देश है जिसके पास इस्तेमाल किए गए न्यूक्लियर फ्यूल को रीप्रोसेस करने की टेक्नोलॉजी और हथियार बनाने लायक प्लूटोनियम निकालने की क्षमता है, जिसे प्लूटोनियम प्रोडक्शन रिएक्टर में सिर्फ दो से तीन महीने तक रेडिएशन वाले यूरेनियम फ्यूल से रिकवर किया जाता है। यानि चीन डर गया है और उसे डर है कि अगर जापान परमाणु बम बना लेता है, तो पूर्वी जापान सागर को हड़पने की उसकी मंशा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

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