सीनेट में विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने बोर्ड ऑफ पीस पर शहबाज शरीफ को जमकर घेरा है। अब्बास का जवाब देते हुए अहसान इकबाल ने कहा, ‘पाकिस्तान को राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी से सीख लेने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार पर लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता। पीस बोर्ड में भूमिका से पाकिस्तान की आवाज मजबूत होती है। शहबाज शरीफ का कदम पाकिस्तान की राजनयिक सफलता है।
ये हमारा सोचा-समझा कदम
संसद के सत्र में इकबाल ने कहा, ‘अगर पाकिस्तान इस फोरम से बाहर रहता तो विपक्ष दावा करता कि देश अलग-थलग पड़ गया है। अब शामिल होने के लिए भी आलोचना हो रही है। हम साफ करना चाहते हैं कि गाजा पीस बोर्ड में शामिल होना इजरायल के फिलिस्तीनियों पर अत्याचार को रोकने के लिए एक सोचा-समझा कदम है।’
इकबाल ने आगे कहा, ‘ इजरायल के खिलाफ पाकिस्तान है और रहेगा। पाकिस्तान सरकार ने इजरायल पर अपना सैद्धांतिक रुख नहीं बदला है। पाकिस्तान ने इजरायल को हमेशा हमलावर माना है, जिसके हाथ बेगुनाह फिलिस्तीनियों के खून से सने हैं। हमारी सरकार 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश का समर्थन करती है।’
विपक्ष ने किया हंगामा
पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर जोरदार तरीके से विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह फिलिस्तीनियों के साथ धोखा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए शहबाज शरीफ की सरकार ने घुटने टेक दिए हैं।
JUI-F प्रमुख मौलाना फजलुर्रहमान ने शहबाज शरीफ के फैसले की आलोचना करते हुए कहा, ‘हमने अमेरिका और इजरायली आक्रामकता को मजबूत किया है और हमास को धमका रहे हैं। यह कैसा फोरम है, जो शांति के बजाय धमकियों से शुरू हुआ है। पाकिस्तान को इसमें शामिल होने से बचना चाहिए था।’
दावोस में बना पीस बोर्ड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दावोस में बोर्ड ऑफ पीस की शुरुआत की है। इसमें पाकिस्तान, इंडोनेशिया, तुर्की, अर्जेंटीना और हंगरी समेत 19 देशों के नेताओं और सीनियर अधिकारी शामिल हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मंच को ना सिर्फ गाजा बल्कि पूरी दुनिया में विवाद सुलझाने वाला मंच कहा है।













