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  • डॉक्‍टर नहीं, एआई देगा पर्चे पर दवाई… इस देश ने उठाया अनोखा कदम लेकिन कौन से सवाल बढ़ा रहे चिंता?

    वॉश‍िंंगटन : आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्‍तेमाल हमारी रोजाना जिंदगी में बढ़ता जा रहा है। तमाम क्षेत्रों में अब एआई अपनी भूमिका का विस्‍तार कर रहा है। हेल्‍थकेयर के क्षेत्र में एआई कई वर्षों से इस्‍तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अमेरिका के यूटा में बड़ा कदम उठाया गया है। यह यूएस का पहला ऐसा


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    वॉश‍िंंगटन : आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्‍तेमाल हमारी रोजाना जिंदगी में बढ़ता जा रहा है। तमाम क्षेत्रों में अब एआई अपनी भूमिका का विस्‍तार कर रहा है। हेल्‍थकेयर के क्षेत्र में एआई कई वर्षों से इस्‍तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अमेरिका के यूटा में बड़ा कदम उठाया गया है। यह यूएस का पहला ऐसा राज्‍य बन गया है जहां अब एआई कुछ खास तरह की दवाओं के पर्चे को रिन्‍यू करेगा। यह सब एक पायलट प्रोजेक्‍ट का हिस्‍सा है। रिपोर्टों के अनुसार, डॉक्‍ट्रॉनिक (Doctronic) नाम की एक हेल्‍थ-टेक कंपनी के साथ मिलकर इस प्रोजेक्‍ट को शुरू किया गया है। बताया जा रहा है कि एआई सिस्‍टम के जरिए उन मरीजों के लिए दवाओं के पर्चे को रिन्‍यू किया जाएगा, जिन्‍हें कोई पुरानी बीमारी है। इसमें डॉक्‍टर की सीधी दखलअंदाजी नहीं होगी।

    क्‍या भरोसा कर पाएंगे मरीज?

    पॉलिट‍िको की रिपोर्ट (ref.) के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्‍या मरीज, एआई के रिन्‍यू किए गए पर्चे पर भरोसा कर पाएंगे। क्‍या वो ये यकीन कर पाएंगे कि उनकी दवाई का पर्चा डॉक्‍टर ने नहीं, बल्कि मशीन ने एआई ने रिन्‍यू किया है। यूटा में शुरू हुए इस प्रोजेक्‍ट को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सुरक्षा, जवाबदेही और रेगुलेशन जैसे सवालों को इस प्रोजेक्‍ट ने जन्‍म दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, फूड एंड ड्रग एडम‍िनिस्‍ट्रेशन यानी FDA ने अभी तक इस योजना पर कोई राय नहीं दी है। कहा जा रहा है कि अगर FDA, इसे रेगुलेट करता है तो शायद प्रोजेक्‍ट का बहुत विस्‍तार ना हो पाए।

    सरकार ने क्‍या कहा?

    रिपोर्ट के अनुसार, यूटा राज्‍य के अधिकारी इस योजना के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरीके को अपनाकर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की बढ़ती लागत, डॉक्‍टरों की कमी जैसी परेशानियों से जूझा जा सकता है। दुनिया के अन्‍य देशों की तरह अमेरिका के इस राज्‍य में भी ग्रामीण इलाकों में डॉक्‍टरों की कमी है। यूटा डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मार्गरेट बुसे ने एक बातचीत में कहा कि हेल्‍थ से जुड़ा खर्च बढ़ रहा है। अगर रूटीन पर्चे को ऑटोमेट किया जा सके तो इससे डॉक्‍टरों पर प्रेशर कम होगा। मरीजों का भी पैसा बचेगा।

    क्‍या कह रहे मेड‍िकल पेशे से जुड़े लोग?

    यूटा में शुरू हुई इस योजना पर मेड‍िकल ग्रुपों की प्रतिक्र‍िया भी सामने आई है। एआई से दवाइयां लिखने के लिए फैसले पर उन्‍होंने चिंता जताई है। अमेरिकन मेड‍िकल एसोसिएशन का भी बयान आया है। उसका कहना है कि हेल्‍थ सेक्‍टर को बेहतर करने में एआई भूमिका निभा सकता है, लेकिन डॉक्‍टरों की सलाह के बिना यह मरीज और डॉक्‍टर दोनों के लिए खतरे पैदा कर सकता है।

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