रॉयल डेनिश आर्मी के चीफ पीटर बॉयसेन के साथ सैनिकों ने पश्चिमी ग्रीनलैंड के कंगेरलुस्सुअक में लैंड किया। डेनमार्क ब्रॉडकास्टर TV2 ने बताया कि सोमवार शाम को ग्रीनलैंड के मुख्य इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंगेरलुसुआक में डेनिश लड़ाकू सैनिकों की टुकड़ी उतरी। डेनमार्क ने बीते कुछ दिनों में इस आर्कटिक द्वीप पर अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाई है।
डेनमार्क सैनिक ग्रीनलैंड में रहेंगे
आर्कटिक में डेनमार्क के टॉप मिलिट्री कमांडर मेजर जनरल सोरेन एंडरसन ने बताया है कि 100 डेनिश सैनिक पहले ही ग्रीनलैंड की राजधानी नुक पहुंच चुके हैं। इतने ही सैनिक पश्चिमी ग्रीनलैंड के कांगेरलुसुआक में मौजूद हैं। सोमवार को एक और टुकड़ी आई है। ये सैनिक आर्कटिक एंड्योरेंस ट्रेनिंग एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगे।
एंडरसन ने कहा है कि ग्रीनलैंड भेजे जा रहे अतिरिक्त सैनिक जल्दी घर नहीं लौटेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम विदेशी सैनिकों के सहयोग से एक से दो साल तक मिशन जारी रखेंगे। हम 2026 और अगले साल ग्रीनलैंड में सैनिकों को तैनात करने के लिए एक शेड्यूल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कह सकते हैं कि यह एक लॉन्ग-टर्म सैन्य मिशन है।’
नाटो की भूमिका पर भी जोर
डेनमार्क की सरकार ने सोमवार को ग्रीनलैंड के लिए नाटो मिशन का अनुरोध किया है। डेनिश रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पॉलसेन ने ब्रसेल्स में नाटो गठबंधन के प्रमुख मार्क रूट के साथ बैठक के बाद कहा कि हमने इसका प्रस्ताव दिया है। डेनमार्क की ओर से लगातार ये कहा गया है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई नाटो को खत्म कर सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों से डेनमार्क में गुस्सा है। डेनमार्क, ग्रीनलैंड और यूरोप के नेता लगातार कह रहे हैं कि अमेरिका को आक्रामकता से बचना चाहिए लेकिन ट्रंप इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना हुए हैं। ऐसे में विवाद बढ़ता जा रहा है। ग्रीनलैंड 57,000 की आबादी वाला इलाका है, जिसकी रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के हाथों में है।















