ट्रंप ने मोदी को लेकर क्या कहा था?
ट्रंप ने दो दिन पहले ही बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में कहा, “…वह जंग (भारत-पाकिस्तान युद्ध) जोरों पर थी। प्लेन गिराए जा रहे थे। और मेरी उन दोनों से फोन पर बात हुई, और मैं उन्हें थोड़ा-बहुत जानता था। मैं प्राइम मिनिस्टर मोदी को बहुत अच्छे से जानता था…मैंने उन्हें फोन किया और कहा, सुनो, अगर तुम लोग इसे सुलझा नहीं पाए तो मैं तुम दोनों के साथ ट्रेड डील नहीं करूंगा… और अचानक, हमने एक डील कर ली।”
पीएम मोदी की तारीफ करते हैं ट्रंप
ट्रंप बार-बार पीएम मोदी की तारीफ करते नहीं थकते, लेकिन भारत की आलोचना से भी बाज नहीं आते। ट्रंप ने कई मौकों पर पीएम मोदी को अपना बहुत अच्छा दोस्त बताया है। उन्होंने पीएम मोदी को एक मुश्किल मोलभाव करने वाला व्यक्ति भी कहा था। इसके बावजूद ट्रंप ने भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया था। हालांकि, अब उन्होंने भारत के साथ ट्रेड डील के तहत टैरिफ को कम किया है।
चीन से डरे हुए क्यों हैं ट्रंप?
ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद शुरुआत में चीन पर ही सबसे ज्यादा निशाना साधा था, लेकिन बीजिंग की जवाबी कार्रवाई को देखकर उनके होश उड़ गए। चीन ने अमेरिका को दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का निर्यात रोक दिया। इसके अलावा चीन ने अमेरिकी सामानों पर भी उतना ही टैरिफ लगा दिया, जितना ट्रंप प्रशासन ने लगाया था। इससे अमेरिका की डिफेंस इंडस्ट्रीज लगभग ठप पड़ गई। आनन-फानन में अमेरिका और चीन को व्यापार वार्ता करनी पड़ी और बाद में दोनों देश टैरिफ कम करने पर राजी हुए। तब से ट्रंप चीन को लेकर काफी नरम हैं।
चीन के रूसी तेल खरीद को लेकर भी ट्रंप चुप
ट्रंप बार-बार रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर हमला करते रहे हैं। उन्होंने रूसी तेल को लेकर खासतौर पर भारत की आलोचना सबसे ज्यादा की है। ट्रंप ने इसके लिए भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इसके अलावा उन्होंने यूरोपीय देशों को भी रूसी तेल और गैस खरीदने को लेकर खरी खोटी सुनाई है। हालांकि, ट्रंप ने रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार चीन को लेकर हमेशा ही चुप्पी साधी है। ट्रंप ने एक बार भी रूसी तेल खरीदने को लेकर चीन की निंदा नहीं की है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने पर चीन के खिलाफ कोई भी टैरिफ नहीं लगाया है।













