• National
  • दिल्ली-NCR में खराब हवा के दो गुनहगार, सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण संस्था ने बताए नाम

    नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार दो गुनहगारों का पता चल गया है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण और धूल इसके प्रमुख कारण हैं, जिसके चलते सर्दियों और गर्मियों के मौसम में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बन जाता


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 22, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार दो गुनहगारों का पता चल गया है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण और धूल इसके प्रमुख कारण हैं, जिसके चलते सर्दियों और गर्मियों के मौसम में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बन जाता है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बनी शीर्ष संस्था है।

    वाहनों से उत्सर्जन और धूल मुख्य कारण

    दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर तरह-तरह की बातें होती रही हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी तरह के कुछ लोग इसके लिए सारा दोष दीपावली पर पटाखे जलाने को देते हैं। लेकिन, Azad Hind की एक रिपोर्ट के अनुसार कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने देश की सर्वोच्च अदालत में साफ किया है कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण और वातावरण में मौजूद धूल इसके सबसे बड़े कसूरवार हैं। हाल ही में मेनका गांधी ने इस मामले में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को इस समस्या से पूरी तरह से क्लीनचिट दे दी थी।

    जाम वाले एमसीडी टोल प्लाजा शिफ्ट होंगे

    इसके साथ ही सीएक्यूएम ने वायु की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए कुछ शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग टर्म में उठाए जा सकने वाले उपायों वाली सिफारिशों की लिस्ट भी दी है। इन प्रस्तावित उपायों में दिल्ली नगर निगम (MCD) के टोल प्लाजा को ट्रैफिक जाम से छुटकारा दिलाने का प्रस्ताव भी शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्तों में मांगा एक्शन प्लान

    सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली जस्टिस जॉयमाल्या बागजी और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने सभी स्टेहोल्डरों से कहा है कि सीएक्यूएम ने जो भी सिफारिशें की हैं, उसपर आपत्ति न करें। इसने केंद्र सरकार, दिल्ली, राजस्थान, यूपी और हरियाणा सरकारों के साथ-साथ विभिन्न नगर निकायों और एमसीडी को 4 हफ्ते के अंदर एक्शन प्लान भी जमा करने को कहा है।

    बड़े विशेषज्ञों ने दिए समाधान के सुझाव

    एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि जो भी सिफारिशें की गई हैं, उसमें शीर्ष विशेषज्ञों की सेवाएं ली गई हैं, जिनमें आईआईटी, बड़े शैक्षणिक संस्थान, रिसर्च संस्था और एनजीओ से जुड़े लोग शामिल हैं। सीएक्यूएम ने कहा कि इस समस्या से छुटकारे के लिए सभी मंत्रालयों, राज्य सरकारों, वैधानिक अथॉरिटी और दूसरी एजेंसियों का पूरा समर्थन चाहिए, क्योंकि यह पूर्ण तालमेल से ही मुमकिन है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।