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  • दो दिन में ₹11 लाख करोड़ स्वाहा! आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल, क्या कह रह एक्सपर्ट्स?

    नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में हाल में काफी गिरावट आई है। पिछले दो सेशन में सेंसेक्स और निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। इस दौरान निवेशकों को करीब 11 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।


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    By Azad Hind Desk मार्च 3, 2026
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    नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में हाल में काफी गिरावट आई है। पिछले दो सेशन में सेंसेक्स और निफ्टी में 2.5 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। इस दौरान निवेशकों को करीब 11 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसकी वजह यह है कि ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच युद्ध फिलहाल थमने की उम्मीद नहीं है। हालांकि लॉन्ग टर्म में भारतीय बाजार का आउटलुक स्ट्रॉन्ग बना हुआ है।

    सोमवार को सेंसेक्स में 1,000 अंक से अधिक गिरावट आई जबकि निफ्टी 300 अंक लुढ़क गया। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर में एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन का कहना है कि बाजार में शॉर्ट टर्म में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सोमवार को India VIX इंडेक्स 25 फीसदी से ज्यादा उछलकर 17.13 पर पहुंच गया। यह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना दिखाता है। लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े देखें तो बड़ी गिरावट से लॉन्ग टर्म में भारत को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है।

    शेयर बाजार का हाल

    • घरेलू शेयर बाजार में लगातार दो दिन गिरावट रही
    • इस दौरान निवेशकों को ₹11 लाख करोड़ की चपत
    • India VIX सोमवार को 25% से ज्यादा उछला

    सिल्वर लाइनिंग

    तन्वी कंचन ने कहा कि भारत की डोमेस्टिक मैक्रो स्टोरी मजबूत बनी हुई है। जनवरी में नेट जीएसटी कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ रुपये रहा और फाइनेंशियल ईयर 2027 में अर्निंग में रिकवरी की उम्मीद है। साथ ही सरकारी बैंकों और मेटल कंपनियों के तिमाही नतीजे मजबूत रहने का अनुमान है। पीएल कैपिटल में हेड एडवाइजरी विक्रम कसाट ने कहा कि नियर टर्म हेडविंड्स के बाजवूद घरेलू मैक्रो मजबूत बने हुए हैं।

    श्रीराम वेल्थ के सीओओ और हेड ऑफ प्रोडक्ट नवल कगलवाला ने कहा कि पश्चिम एशिया के इवेंट से बाजार में गिरावट आई है। पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है लेकिन देखा गया है कि इस तरह की गिरावट शॉर्ट टर्म होती है और इसके बाद बाजार में स्थिरता आती है। अगर और गिरावट आती है तो इससे वैल्यूएशन व्यावहारिक होगी। खास बात यह है कि इस इवेंट का भारत से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन तेल की कीमत और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट से जुड़े सेगमेंट्स में इसका असर दिख सकता है।

    तेल, सोना-चांदी और डॉलर उछले, लेकिन शेयर मार्केट क्रैश, मिडिल ईस्ट में तनाव से महंगाई बढ़ने का खतरा

    बाजार का फायदा

    कागलवाला ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट का भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि कई ग्लोबल मार्केट्स इससे प्रभावित हुए हैं। इससे पूंजी का प्रवाह बदल सकता है। भारत ज्यादा सुरक्षित बाजार है क्योंकि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 7,536 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि घरेलू निवेशकों ने 12,293 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

    यह घबराहट में शेयर बेचने का समय नहीं है बल्कि अनुशासन का समय है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और लेवरेज पोजीशन से बचना चाहिए।
    तन्वी कंचन, एसोसिएट डायरेक्टर, आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर

    तन्वी कंचन ने कहा कि यह घबराहट में शेयर बेचने का समय नहीं है बल्कि अनुशासन का समय है। उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और लेवरेज पोजीशन से बचना चाहिए। एसआईपी निवेशकों को निवेश चालू रखना चाहिए क्योंकि इसी तरह के उतार-चढ़ाव से लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएशन होती है। रेलिगेयर ब्रोकिंग में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट अजित मिश्रा ने कहा कि शॉर्ट टर्म में निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए, पोजीशन साइज हल्का रखनी चाहिए और रिस्क मैनेजमेंट पर फोकस करना चाहिए।

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