एडिशनल डीसीपी निहारिका भट्ट ने बताया कि 18 फरवरी की शाम अनुरूप गुप्ता द्वारका के राधिका अपार्टमेंट से अपनी गाड़ी लेकर निकले थे और इसके बाद लापता हो गए। कई दिन तक कोई जानकारी न मिलने पर उनके भाई ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। डीसीपी अंकित सिंह के निर्देश पर इंस्पेक्टर सुभाष चंद की देखरेख में पुलिस टीम ने CCTV फुटेज और टेक्निकल सर्विलांस के जरिए जांच आगे बढ़ाई।
ड्राइवर से पूछताछ में मिला सुराग
जांच में सामने आया कि अनुरूप गुप्ता आखिरी बार छत्तीसगढ़ निवास पहुंचे थे। वहां से उन्होंने बाइक टैक्सी ली और मटियाला इलाके की एक गली में उतरे। बाइक टैक्सी ड्राइवर से पूछताछ में पुलिस को अहम सुराग मिला। बिल्डिंग में उनकी हत्या की गई और शव के टुकड़े कर 3 बोरियों में भरकर मथुरा नदी में फेंक दी गई।
किडनैप कर बना लिया था बंधक
इसके बाद पुलिस का शक गहराया और कॉल डिटेल जांचते हुए टीम अनुरूप के दोस्त हैप्पी तक पहुंच गई। पूछताछ में हैप्पी ने अपने साथियों और गर्लफ्रेंड राखी की भूमिका कबूल कर ली। पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित यमुनानगर इलाके से शव के टुकड़े भी बरामद किए। पुलिस के अनुसार हैप्पी को लगा था कि अनुरूप गले में सोने की मोटी चेन, ब्रेसलेट और अंगूठियां पहनते हैं तथा कैंटीन चलाते हैं, इसलिए उससे बड़ी रकम वसूली जा सकती है। प्लान के तहत आरोपियों ने अनुरूप को किडनैप कर बंधक बनाया।
राजौरी गार्डन में छोड़ दी थी गाड़ी
रकम हासिल करने में नाकाम रहने पर हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए शव के टुकड़े कर 3 बोरियों में भरकर मथुरा के यमुनानगर इलाके में नदी में फेंक दिया। शव ठिकाने लगाने के लिए अनुरूप की गाड़ी का इस्तेमाल किया गया और बाद में गाड़ी को राजौरी गार्डन इलाके में छोड़ दिया गया।
हिंदी में मेसेज भेजकर करता रहा गुमराह
हत्या के बाद आरोपी अनुरूप के मोबाइल से परिवार और परिचितों को हिंदी में मेसेज भेजकर गुमराह करता रहा। कभी गोवा घूमने की बात लिखता तो कभी किसी लड़की के साथ फोटो भेजकर सबको भरोसा दिलाने की कोशिश करता रहा। यहीं से परिवार को शक हुआ क्योंकि अनुरूप कभी हिंदी में मेसेज नहीं भेजते थे। यही शक बाद में सच साबित हुआ। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की कड़ियां जोड़कर मामले का पर्दाफाश किया।













