ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, “भारतीय निर्यात के लिए सबसे बुरा दौर बीत चुका है और हमें उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्र अच्छा प्रदर्शन करेंगे। 2025-26 में निर्यात 840-850 अरब डॉलर की सीमा में रह सकता है, जबकि 2026-27 में कुल निर्यात 950 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।” डिजिटल सर्विसेज के एक्सपोर्ट के मामले में भारत दुनिया में चौथे पांचवें नंबर पर है। इसमें अमेरिका पहले, यूके दूसरे, आयरलैंड तीसरे और जर्मनी चौथे नंबर पर है।
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लाल सागर का संकट
निर्यातकों का यह भी कहना है कि लाल सागर का संकट काफी हद तक सुलझ गया है। साथ ही, उद्योग ने अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% के भारी टैरिफ को भी अपने हिसाब में एडजस्ट कर लिया है। केंद्र सरकार के एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के समर्थन से भारतीय उद्योग अपने उत्पादों और बाजारों में विविधता ला रहा है। अमेरिका ने पहले भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। रूस से तेल का आयात करने के लिए भारत पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है।
टी टी लिमिटेड के एमडी संजय के जैन ने बताया, “अगले साल टेक्सटाइल और निर्यात में कुल मिलाकर 10-20% की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि भारत और यूके के बीच फ्री ट्रेड डील लागू होने वाली है। साथ ही जीएसटी में कटौती, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के हटने और ड्यूटी फ्री कॉटन जैसी घरेलू पहलों से इस उद्योग में बुनियादी सुधार आएगा।” इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत की तीसरी बड़ी एक्सपोर्ट कैटगरी है।
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अब तक एक्सपोर्ट
वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल-नवंबर के दौरान भारत का कुल निर्यात करीब 562.13 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि के 533.16 अरब डॉलर से 5.43% अधिक है। भारत ने 2025 में तीन महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पक्के किए हैं। इनमें यूके और ओमान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना और न्यूजीलैंड के साथ बातचीत पूरी करना शामिल है। भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के 2026 में लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्यातक अमेरिका के साथ एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते और यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापार समझौते में प्रगति को लेकर सतर्क हैं और उनकी उम्मीदें इन पर टिकी हैं।
एक उद्योग पर्यवेक्षक ने कहा, “एफटीए को परिणाम दिखाने में कुछ समय लगता है, जो अगले साल दिखेगा। हालांकि, अमेरिका के टैरिफ से श्रम-गहन क्षेत्रों को नुकसान हो सकता है। यूरोपीय संघ का बाजार ज्यादा बढ़ नहीं रहा है। पश्चिम एशिया ही निर्यात वृद्धि को गति देगा, ऐसी उम्मीद है।” सेवाओं की बात करें तो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल से आईटी (IT) क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।
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आगे का हाल
टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनु गुप्ता ने कहा, “अगला साल काफी अनिश्चित लग रहा है, जब तक कि अमेरिकी टैरिफ के मोर्चे पर कुछ न हो जाए क्योंकि अमेरिका हमारा सबसे बड़ा बाजार है। खिलौना निर्माण ओईएम द्वारा किया जाता है, इसलिए कुछ कंपनियों ने टैरिफ के कारण भारत से खिलौने बनाने के लिए आवश्यक औजार, जैसे कि मोल्ड्स वियतनाम और इंडोनेशिया में स्थानांतरित कर दिए हैं।”
निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ टेक्सटाइल के लिए नए बिजनेस को आने से रोकेंगे लेकिन अमेरिका के साथ 50-60% नियमित व्यवसाय बना रहेगा। साथ ही करेंसी के मजबूत होने की उम्मीद है। इसके अलावा न्यूजीलैंड से सस्ते ऊन के आयात से घरेलू टेक्सटाइल उद्योग को मदद मिलेगी।
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कच्चा माल
परिधान उद्योग के एक प्रतिनिधि ने कहा, “भारत अपने कई नए एफटीए (FTA) भागीदारों से कच्चा माल खरीदेगा, जिससे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की चिंताएं दूर हो जाएंगी।” हालांकि, 1 जनवरी, 2026 से यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के रिपोर्टिंग से भुगतान चरण में जाने के साथ, यूरोपीय संघ में प्रवेश करने वाले भारतीय स्टील और एल्यूमीनियम के हर शिपमेंट पर कार्बन लागत लगेगी।











