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  • नकली पुलिस बनकर दिल्ली में बैठ लगा दिया 100 करोड़ का चूना, ऐसे धरे गए 2 नटवरलाल

    190 साइबर फ्रॉड की शिकायतें..100 करोड़ से ज्यादा की ठगी और आदमी सिर्फ 2। जी हां, ये सच है दो साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए सैकड़ों लोगों को चूना लगा दिया। दोनों ने मिलकर ही अकेले 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दे डाला। अब ये पुलिस के हत्थे चढ़


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    By Azad Hind Desk फरवरी 9, 2026
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    190 साइबर फ्रॉड की शिकायतें..100 करोड़ से ज्यादा की ठगी और आदमी सिर्फ 2। जी हां, ये सच है दो साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए सैकड़ों लोगों को चूना लगा दिया। दोनों ने मिलकर ही अकेले 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दे डाला। अब ये पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं। पुलिस ने बताया है कि ये दोनों नकली पुलिसवाले बनकर पीड़ितों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट करके पैसा वसूलते थे।

    सरकारी आंकड़ों की बात करें तो इस स्कैम में 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की ट्रांजेक्शन हुई है। आरोपियों की पहचान अनीस सिंह और मणि सिंह के रूप में रूप में हुई है। इन्हें दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक महिला की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया है। इस महिला को इन दोनों ने 3 महीने तक ‘डिजिटल निगरानी’ में रखा था। पुलिस का यह भी कहना है कि आरोपी शेल कंपनियों और कई बैंक खातों के जरिए पैसा इधर से उधर करते थे।

    महिला को कैसे बनाया 3 महीने तक ‘बंदी’

    पुलिस ने शिकायतकर्ता महिला की कहानी साझा करते हुए बताया कि पीड़िता एक होममेकर हैं। उन्हें पिछले साल 15 अक्टूबर से 12 दिसंबर तक ‘डिजिटल बंदी’ बनाकर रखा गया। आरोपी खुद को मुंबई पुलिस साइबर क्राइम ऑफिसर बताते रहे और महिला के साथ बार-बार ठगी की। फर्जी पुलिस ऑफिसर्स ने महिला को डराया कि उसके आधार का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है। फोन पर महिला को बार-बार धमकाया गया कि सिर्फ उसे ही नहीं उसके पति और बेटे को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। बेहतर है कि वो इस बारे में किसी से कोई बात न करे।

    फर्जी पुलिस, फर्जी एफआईआर

    जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि पीड़िता को वीडियो कॉल पर फर्जी FIR और नकली अरेस्ट वॉरंट भी दिखाए गए। उसे आदेश दिया गया कि वो लगातार कॉल पर रहे और अपनी डेली रूटीन की जानकारी देती रहे। महिला में डर बैठाने के लिए यह भी कहा गया कि एक पुलिसकर्मी उसके घर के बाहर तैनात किया गया है।

    कैसे ठगों तक पहुंची पुलिस

    आरोप हैं कि पीड़ित महिला से साइबर ठगों ने अपने खाते में 40 लाख रुपये से ज्यादा का ट्रांसफर कराया। उसे यह भी कहा गया कि वह सभी डिजिटल सबूतों को मिटा दे, जिसमें कॉल लॉग्स ओर ट्रांजेक्शन की डिटेल शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार वेरिफिकेशन के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। इस मामले में पुलिस ने एक e-FIR की, जिसके बाद साइबर सेल को वृंदाक्रत स्काइलाइन शॉपर्स प्राइवेट लिमिटेड में पैसा ट्रांसफर करने के ट्रेस मिले। यह कंपनी पश्चिमी दिल्ली में रजिस्टर्ड थी। इस कंपनी में अनीस और मणि ज्वाइंट डायरेक्टर के रूप में लिस्टेड थे। इन्होंने कंपनी के नाम से 8 बैंक खाते खुलवा रखे थे।

    साइबर ठगी की शिकायत कैसे करें

    अगर आपके पास कोई फोन कॉल या वीडियो कॉल आता है और वे खुद को पुलिसकर्मी, सीबीआई अफसर या कोई बड़ा अधिकारी बताता है तो घबराएं नहीं। इस बात को हमेशा ध्यान रखे कि पुलिस कभी भी वीडियो कॉल नहीं करती है। फिर भी अगर आपके साथ कोई साइबर अपराध हो जाता है तो नजदीक के पुलिस स्टेशन या साइबर सेल की वेबसाइट पर तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साइबर सेल के पोर्टल से शिकायत कैसे दर्ज कराएं, इसकी स्टेप बाय स्टेप जानकारी आपको ‘साइबर सेल में एफआईआर कैसे करें’ पर क्लिक कर सकते हैं।

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