चुनाव आयोग के अधिकार को लेकर सवाल
चुनाव आयोग की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट द्विवेदी ने बेंच को बताया कि वह निर्देश लेंगे और इस मामले पर कोर्ट को जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सिर्फ वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन की हद तक ही नागरिकता तय कर सकता है और किसी को देश से बाहर नहीं भेज सकता या यह तय नहीं कर सकता कि किसी व्यक्ति के पास भारत में रहने का वीजा है या नहीं।
याचिकाकर्ता NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हालांकि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि वोट देने के लिए नागरिकता जरूरी है, लेकिन मुख्य सवाल यह था कि क्या चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का अधिकार है भी या नहीं।
वोटर लिस्ट से हटाए नाम सार्वजनिक करे EC
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग से कहा कि केरल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोसेस के बाद पब्लिश की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएं, ताकि प्रभावित वोटर आपत्ति उठा सकें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग से नामों को हटाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की डेडलाइन को विशेष रूप से दो सप्ताह के लिए बढ़ाने पर भी विचार करने को कह।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने कहा कि डेडलाइन बढ़ाने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा। बेंच केरल में किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी।














