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  • नींव है मकान की बुनियाद, नींव डालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

    वास्तु शास्त्र के अनुसार नींव डालते समय भूमि पूजन अवश्य करना चाहिए, ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व से शुरुआत करनी चाहिए, घर के मालिक के अनुसार शुभ मुहूर्त का चयन करना चाहिए। मुहूर्त चयन करते समय चन्द्रमा, मकान बनवाने वाले की जन्म राशि से चतुर्थ, अष्टम, द्वादश नहीं होना चाहिए। इस प्रकार अन्य ग्रह गोचर का


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    By Azad Hind Desk जनवरी 25, 2026
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    वास्तु शास्त्र के अनुसार नींव डालते समय भूमि पूजन अवश्य करना चाहिए, ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व से शुरुआत करनी चाहिए, घर के मालिक के अनुसार शुभ मुहूर्त का चयन करना चाहिए। मुहूर्त चयन करते समय चन्द्रमा, मकान बनवाने वाले की जन्म राशि से चतुर्थ, अष्टम, द्वादश नहीं होना चाहिए। इस प्रकार अन्य ग्रह गोचर का विचार भी मुहूर्त निकालते समय परमावश्यक है। नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए चांदी के नाग-नागिन व कलश जैसी वस्तुएं रखना महत्वपूर्ण है, ताकि घर में सुख-समृद्धि और स्थायित्व लंबे समय तक रह सके।

    • शुभ मुहूर्त में ही नींव की खुदाई शुरू करें तथा विधिवत भूमि पूजन करें।
    • वास्तु और ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श कर नींव डालने का शुभ मुहूर्त निकलवाएं, और भूमि शयन यानी भूमि के आराम करने के समय पर भी ध्यान रखें।
    • एक तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्के, हल्दी, कौड़ी और अन्य शुभ सामग्री रखकर पूजा करें और नींव में स्थापित करें।
    • नींव की खुदाई हमेशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व से शुरू करें, उसके बाद आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व, वायव्य कोण यानी उत्तर-पश्चिम और फिर नैऋत्य कोण यानी दक्षिण-पश्चिम की खुदाई करें।
    • दक्षिण-पश्चिम में नींव गहरी और उत्तर-पूर्व में कम गहरी होनी चाहिए।
    • कोणों की खुदाई के बाद पूर्व, उत्तर, पश्चिम और दक्षिण दिशा में क्रम से खुदाई करें।
    • अन्य मांगलिक वस्तुओं के साथ पाताल लोक के स्वामी शेषनाग की कृपा और घर की रक्षा के लिए चांदी के नाग-नागिन के जोड़े को नींव में स्थापित करें।
    • नींव आदि का शुभ मुहूर्त मकान बनवाने वाले गृह स्वामी की ग्रह स्थिति के अनुसार अलग से निकलवाना चाहिए। सामान्य रूप से वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, जून, नवंबर और दिसंबर घर निर्माण की शुरुआत के लिए सबसे उत्तम महीने हैं, लेकिन ग्रह स्वामी को अपनी जन्म कुंडली में चलने वाली महादशा, अंतर्दशा तथा अपनी राशि और लग्न को ध्यान में रखकर मुहूर्त निकलवाना चाहिए।
    • नक्शा पास करवाते समय आर्किटेक्ट के साथ वास्तुशास्त्री से अवश्य यह सुनिश्चित करें कि मंदिर यानी पूजाघर ईशान कोण में हो, ईशान कोण में शौचालय सबसे गंभीर वास्तु दोष की श्रेणी में आता है, इसलिए ईशान कोण की शुद्धता पर अवश्य ध्यान देना चाहिए। इस प्रकार कौन-सा कमरा कहां होना चाहिए, अन्य बातों पर गहन विश्लेषण के पश्चात ही मकान बनवाना प्रारम्भ करना चाहिए।
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