• National
  • पाकिस्तान के ‘तख्तापलट’ गर्वनर जब बने भारत के चीफ गेस्ट, गणतंत्र दिवस का वो 71 वर्ष पुराना किस्सा

    नई दिल्ली: हर साल गणतंत्र दिवस पर भारत अलग-अलग राष्ट्र अध्यक्षों को चीफ गेस्ट के तौर पर आमंत्रित करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत एक बार पाकिस्तान ी नेता को भी गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट बना चुका है। पाकिस्तान के साथ जिस तरह के संबंध आज भारत के हैं, उस स्थिति


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: हर साल गणतंत्र दिवस पर भारत अलग-अलग राष्ट्र अध्यक्षों को चीफ गेस्ट के तौर पर आमंत्रित करता है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत एक बार पाकिस्तान ी नेता को भी गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट बना चुका है। पाकिस्तान के साथ जिस तरह के संबंध आज भारत के हैं, उस स्थिति में ये सोचना भी गुनाह है। लेकिन भारत आजादी के बाद एक बार ऐसा कर चुका है। ये वो किस्सा है, जो इतिहास के पन्नों में कहीं दबा रह गया और जिसकी वर्तमान में ज्यादा चर्चा भी नहीं होती तो आइए आपको इस ऐतिहासिक किस्से के बारे में बताते हैं।

    साल था 1955 और जिस पाकिस्तानी नेता को भारत ने गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट बनाया था उनका नाम मलिक गुलाम मोहम्मद था, उस समय वह पाकिस्तान के गवर्नर जनरल थे। ये वो समय था, जब भारत स्वतंत्र होने के बाद अपने कई संस्थानों और परंपराओं को आकार दे रहा था। मलिक गुलाम मुहम्मद को गणतंत्र दिवस पर बुलाने की एक वजह यह भी थी कि उनका एडमिनिस्ट्रेटिव बैकग्राउंड भारत से भी जुड़ा रहा था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी और ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम किया था। मलिक गुलाम मुहम्मद ने 1947 से पहले इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस में काम किया और हैदराबाद के निजाम के फाइनेंशियल एडवाइजर थे। बंटवारे के बाद, वह पाकिस्तान चले गए और उसके पहले फाइनेंस मिनिस्टर बने।

    मिलिट्री लीडरशिप के समर्थन में कदम

    पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की 1951 में हत्या के बाद, ख्वाजा नजीमुद्दीन गवर्नर जनरल के पद से प्रधानमंत्री बन गए। इसके बाद मलिक गुलाम मुहम्मद को गवर्नर जनरल बनाया गया। उनके कार्यकाल में पाकिस्तान में बड़े संवैधानिक बदलाव हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री ख्वाजा नजीमुद्दीन की सरकार को 1953 में बर्खास्त कर दिया। उन्होंने पाकिस्तान की संविधान सभा को 1954 में भंग कर दिया। ये कदम सीनियर मिलिट्री लीडरशिप के समर्थन से उठाए गए थे, जिसमें जनरल अयूब खान भी शामिल थे। यही बाद में पाकिस्तान के आर्मी चीफ और राष्ट्रपति भी बने।

    तब कई प्रथाएं भी की गई थीं शुरू

    बंटवारे के बाद के सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद, मलिक गुलाम मुहम्मद को राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर 1955 के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। 1955 का गणतंत्र दिवस समारोह भारत के लिए इसलिए भी खास था क्योंकि उस साल शुरू की गई कई प्रथाएं आगे चलकर स्थायी परंपराएं बन गईं।

    राजपथ पर गणतंत्र दिवस

    1950 से 1954 तक, गणतंत्र दिवस समारोह इरविन एम्फीथिएटर (अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम) जैसे जगहों पर आयोजित किए जाते थे। यह समारोह पहली बार 1955 में राजपथ पर आयोजित किया गया, जिससे यह स्थायी स्थान बन गया।

    स्थायी परेड फॉर्मेट

    पहले परेड इरविन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला और रामलीला मैदान सहित अलग-अलग जगहों पर होती थी। 1955 में, राजपथ को परेड के लिए फिक्स्ड रूट तय किया गया, जिससे इस इवेंट को एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट मिला।

    समारोह का विस्तार

    शुरुआती गणतंत्र दिवस कार्यक्रम काफी छोटे थे, जिनमें कम लोग शामिल होते थे। 1955 तक, समारोह का पैमाना बढ़ गया था, जिसमें ज्यादा मिलिट्री टुकड़ियां और ऑर्गेनाइज्ड बैंड परफॉर्मेंस शामिल थे।

    तीनों सशस्त्र बलों का प्रदर्शन

    जहां पहले की परेड में ज्यादातर जमीनी सेना पर ध्यान दिया जाता था, वहीं 1955 के समारोह में आर्मी, नेवी और एयर फोर्स ने मिलकर हिस्सा लिया, जिसमें इंडियन एयर फोर्स का फ्लाईपास्ट भी शामिल था।

    सांस्कृतिक झांकियों की शुरुआत

    1950 के दशक के बीच में गणतंत्र दिवस परेड में सांस्कृतिक और राज्यों की झांकियों की शुरुआत हुई, जिससे मिलिट्री डिस्प्ले से परे एक नया आयाम जुड़ा और यह बाद के सालों में एक रेगुलर फीचर बन गया।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।