पाकिस्तान अब भी दे रहा आतंकियों को मदद
आज़ाद हिन्द के सवाल के जवाब में जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद टेररिस्ट इनिसिएटेट इंसिडेंड तकरीबन खत्म हो गए हैं। लेकिन हमने जम्मू-कश्मीर में सेना की तैनाती में कोई कमी नहीं की है और हमने उतना ही दबाव बनाकर रखा है। आर्मी चीफ ने कहा कि आईबी के दूसरी तरफ 2 और एलओसी के दूसरी तरफ 6 आतंकी कैंप हैं।
पाकिस्तान अब भी आतंकियों को मदद दे रहा है और उन लोगों को मदद दे रहा है जो लोगों को रेडिकलाइज कर यहां भेजते हैं। उन्होंने कहा कि एलओसी पर हम पूरी तरह अलर्ट हैं क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर जारी है।
पाकिस्तान से आए ड्रोन का मसला उठाया
आज़ाद हिन्द के सवाल के जवाब में आर्मी चीफ ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से कुछ छोटे ड्रोन आए थे। 10 तारीख के आसपास 6-7 ड्रोन देखे गए। 11-12 तारीख को 2 से 3 ड्रोन देखे गए। ये डिफेंसिव ड्रोन थे जो ऊपर आकर देखना चाहते थे कि कहीं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई तो नहीं हो रही, हो सकता है कि वो ये भी देख रहे हों कि कहीं इंडियन आर्मी की तैनाती में कोई गैप तो नहीं है जहा से वो आतंकी भेज सकें।
आर्मी चीफ ने कहा कि उन्होंने देख लिया होगा कि आज की तारीख में ऐसा कोई गैप नहीं है जहां से पाकिस्तान आतंकी भेज सके। उन्होंने बताया कि मंगलवार को डीजीएमओ बातचीत हुई और पाकिस्तान से साफ कहा गया कि ये हमें मंजूर नहीं है और इसमें लगाम लगाएं।
ईस्टर्न लद्दाख में स्थिति
आर्मी चीफ ने एलएसी की स्थिति पर कहा कि हम दोनों तरफ से भरोसा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अलग अलग स्तर पर बातचीत होती है ताकि छोटे इश्यू वहीं पर रिजॉल्व हो जाए। हमने ईस्टर्न कमांड में भी ऐसी मीटिंग प्रपोज की है। उन्होंने कहा कि LAC पर हमारी तैनाती संतुलित और मजबूत है।
ऑपरेशन सिंदूर का टर्निंग पॉइंट
ऑपरेशन सिंदूर के टर्निंग पॉइंट का जिक्र करते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि पहला ट्रेनिंग पॉइंट 22 मिनट की स्ट्राइक थी उससे पाकिस्तान का डिसिजन मेकिंग साइकल हिल गया था उन्हें समझने में वक्त लगा। दूसरा टर्निंग पॉइंट 10 मई को सुबह तीनों सेनाओं को कुछ ऐसे निर्देश दे दिए गए थे कि अगर ये लड़ाई आगे बढ़ती तो इसमें क्या होना था, ये जिसे समझ में आना था उसे आ चुका था। क्योंकि उसकी (पाकिस्तान) समझ में आ चुका था, उसे सेटेलाइट से पूरी खबर थी कि कौन सा शिप, या कौन सा स्ट्राइक कोर या कौन सा एयरक्राफ्ट कहां मूव कर रहा है। जब उन्होंने डॉट्स कनेक्ट किए तो समझ आ गया कि इस लड़ाई को यहां रोकना उनके लिए फायदेमंद होगा।
रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत
आर्मी चीफ ने कहा कि हमें रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत है और ये जितना जल्दी हो जाए उतना अच्छा है। साथ ही बताया कि आर्मी में रीस्ट्रक्चरिंग जारी है। 25 भैरव बटालियन बननी है, 15 शक्तिबाण रेजिमेंट बनाएंगे और फिर बाद में 11 और बनाएंगे। इसी तरह रूद्र ब्रिगेड और दिव्यास्त्र बैटरी भी बन रही हैं। उन्होंने बताया कि इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) को भी अप्रूवल मिल गया है।
बांग्लादेश आर्मी चीफ से नियमित बातचीत
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि हमारी तीनों सेनाओं का लगातार कम्युनिकेशन बांग्लादेश की मिलिट्री से है। उन्होंने कहा कि मेरी बांग्लादेश आर्मी चीफ से नियमित बातचीत होती है। आर्मी चीफ ने कहा कि हमारा मकसद ये है कि किसी तरह का मिसकम्युनिकेशन या मिसअंडरस्टैंडिंग ना हो। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की सेनाएं जो भी कार्यवाही कर रही हैं वह भारत विरोधी नहीं है।
कैपेबिलिटी डिवेलपमेंट का काम हम भी करते हैं और वे भी कर सकते हैं। हम पूरी स्थिति लगातार मॉनिटर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ मिलिट्री रिलेशन में कोई कमी नहीं आई है।














