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  • पीएम मोदी के इजरायल दौरे को एक्सपर्ट ने बताया ‘इम्तिहान’, अरब देशों को नाराज नहीं करना चाहेगा भारत

    तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल पहुंचे हैं, जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ है। पीएम मोदी का 2017 के बाद दूसरा और गाजा में युद्ध के बाद यह पहला इजरायल दौरा है। नरेंद्र मोदी इजरायल की संसद को संबोधित करेंगे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के साथ मुलाकात करेंगे। उनके


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    तेल अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल पहुंचे हैं, जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ है। पीएम मोदी का 2017 के बाद दूसरा और गाजा में युद्ध के बाद यह पहला इजरायल दौरा है। नरेंद्र मोदी इजरायल की संसद को संबोधित करेंगे और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के साथ मुलाकात करेंगे। उनके शेड्यूल में फिलिस्तीनी नेताओं के साथ कोई मीटिंग तय नहीं है। ऐसे में एक्सपर्ट पीएम मोदी के दौरे को भारत के अरब दुनिया के साथ संबंधों के लिए एक इम्तिहान की तरह देख रहे हैं।

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में मोदी इजरायल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते सुधरे और फिलहाल भारत इजरायली हथियारों के सबसे बड़े खरीदारों में से है। एनालिस्ट का कहना है कि मोदी का दौरा भारत की विदेश नीति का टेस्ट करेगा क्योंकि दिल्ली इजरायल और दूसरे मिडिल ईस्ट देशों, खासतौर से मुस्लिम मुमालिक के साथ रिश्तों को बैलेंस करने की कोशिश कर रही है।

    भारत कैसे साधेगा अरब दुनिया में संतुलन

    विदेश मामलों के एक्सपर्ट हर्ष वी. पंत कहते हैं, ‘भारत यह दिखाना चाहता है कि वह इजरायल के साथ अपनी पार्टनरशिप के लिए कमिटेड है। साथ ही मिडिल ईस्ट में अपनी प्राथमिकताओं को भी बैलेंस करने की कोशिश कर रहा है। भारत ने 7 अक्टूबर को इजरायल में हुए हमले की निंदा की तो गाजा में आम लोगों के मारे जाने पर भी चिंता जताई। भारत ने फिलिस्तीन के टू-स्टेट समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराया है।

    पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है। एक बड़ी चिंता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ मिलिट्री कार्रवाई की धमकी है। अमेरिका हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है ताकि ईरान पर अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए दबाव डाला जा सके।

    द्विपक्षीय बातचीत तक सीमित रहेंगे पीएम मोदी

    एनालिस्ट का कहना है कि मोदी के दौरे का फोकस पूरी तरह से द्विपक्षीय बातचीत पर होगा। क्षेत्रीय तनाव के बारे में कोई भी चर्चा शायद बंद दरवाजों के पीछे ही रहेगी। इसकी वजह यह है कि दिल्ली के ईरान और मिडिल ईस्ट के कई दूसरे देशों के साथ भी पुराने और मजबूत संबंध हैं।

    ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन थिंक-टैंक के मिडिल ईस्ट ऑफिस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कबीर तनेजा ने कहते हैं, ‘भारत की राय है कि क्षेत्रीय झगड़े इस क्षेत्र को ही सुलझाने हैं। जैसे भारत अपने मामलों में बाहरी दखल की उम्मीद नहीं करता, वैसे ही वह मिडिल ईस्ट पर भी यह सिद्धांत लागू होता है।’

    किसी को नाराज नहीं करेंगे पीएम मोदी

    विशेषज्ञों को लगता है कि यह विजिट इंडिया का लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक कैलकुलेशन दिखाता है। तनेजा का कहना है कि मोदी भारत-इजरायल संबंधों की तारीफ करेंगे लेकिन इस बात ध्यान रखेंगे कि मिडिल ईस्ट में उन पार्टनर्स के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में कोई रुकावट ना आए, जो इजरायल की बुराई करते हैं।

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