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  • पूर्व नौसेना प्रमुख को साबित करनी होगी अपनी नागरिकता? चुनाव आयोग के नोटिस पर उठ रहे सवाल

    नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) को नोटिस जारी कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अपनी पहचान स्थापित करने के लिए एक बैठक में उपस्थित होने को कहा है। सेवानिवृत्ति के बाद से गोवा में रह रहे एडमिरल प्रकाश ने कहा कि यदि एसआईआर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 12, 2026
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    नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड) को नोटिस जारी कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत अपनी पहचान स्थापित करने के लिए एक बैठक में उपस्थित होने को कहा है। सेवानिवृत्ति के बाद से गोवा में रह रहे एडमिरल प्रकाश ने कहा कि यदि एसआईआर प्रपत्र अपेक्षित जानकारी नहीं जुटा रहे हैं तो उनमें संशोधन किया जाना चाहिए। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 2002 में अंतिम बार अपडेटिड मतदाता सूची में उनके विवरण दर्ज नहीं हैं और वह ‘अनमैप’ श्रेणी में आते हैं।

    सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कुछ लोगों ने सवाल किया कि पूर्व नौसेना प्रमुख का पीपीओ (पेंशन भुगतान आदेश) और जीवन प्रमाणपत्र पहले से सरकारी डेटाबेस में उपलब्ध हैं तो एसआईआर टीम को और क्या चाहिए। दक्षिण गोवा की जिला निर्वाचन अधिकारी एग्ना क्लीटस ने कहा, ‘ज्यादातर ऐसे मामलों में यही हो रहा है। एडमिरल प्रकाश ‘अनमैप’ श्रेणी में आते हैं।’ दक्षिण गोवा की जिलाधिकारी क्लीटस ने कहा कि वह नौसेना के पूर्व अधिकारी के प्रपत्र को सोमवार को देखेंगी और प्राधिकारी उनसे संपर्क करेंगे।

    भारत-पाकिस्तान के 1971 के युद्ध में अपनी भूमिका के लिए वीर चक्र से सम्मानित एडमिरल प्रकाश को एसआईआर ‘सुनवाई नोटिस’ के तहत अपनी पहचान स्थापित करने के लिए निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित रहने को कहा गया है।

    पूर्व एडमिरल प्रकाश ने क्या कहा?

    इस नोटिस को लेकर ऑनलाइन चर्चा शुरू होने के बाद पूर्व एडमिरल प्रकाश ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मुझे न तो किसी विशेष सुविधा की जरूरत है, न ही मैंने 20 साल पहले सेवानिवृत्ति के बाद कभी ऐसी कोई मांग की है। मैंने और मेरी पत्नी ने आवश्यकतानुसार एसआईआर प्रपत्र भरे थे और ईसी वेबसाइट पर गोवा की प्रारूप मतदाता सूची 2026 में अपने नाम देखकर प्रसन्न थे। हालांकि, हम ईसी नोटिस का पालन करेंगे।’

    उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘क्या मैं निर्वाचन आयोग को यह इंगित कर सकता हूं कि (क) यदि एसआईआर प्रपत्र आवश्यक जानकारी नहीं जुटा रहे हैं तो उन्हें संशोधित किया जाना चाहिए; (ख) बीएलओ (बूथ स्तर अधिकारी) ने हमसे तीन बार मुलाकात की और वे अतिरिक्त जानकारी मांग सकते थे; (ग) हम 82 एवं 78 वर्ष के हैं और हमें 18 किलोमीटर दूर दो अलग-अलग तिथियों पर उपस्थित होने को कहा गया है।’

    • लेफ्टिनेंट कर्नल टी. एस. आनंद (सेवानिवृत्त) ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘मुझे लगता है कि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ होगा, लेकिन यदि ऐसा नोटिस आता है तो हर नागरिक, जिसके दस्तावेज ठीक हैं, वह जाकर दिखा सकता है, इसमें कुछ गलत नहीं है। इसलिए एडमिरल अरुण प्रकाश सर के मामले में उनका पीपीओ/वेटरन कार्ड पर्याप्त प्रमाण है और प्रोटोकॉल के अनुसार एसआईआर टीम उनके घर जा सकती है।’
    • खुद को ‘ऑपरेशन विजय’ और ‘ऑपरेशन मेघदूत’ में भाग लेने वाला सैन्यकर्मी बताते हुए एक अन्य ‘यूजर’ ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मेरा, उनका और आपका पीपीओ और जीवन प्रमाणपत्र पहले से सरकारी डेटाबेस में है। एसआईआर टीम को प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए कीबोर्ड पर कुछ कुंजियां दबानी हैं। सामान्य समझ की कमी है।’
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