प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए पीएफ एक अनिवार्य सरकारी बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा कंट्रीब्यूट करता है जबकि कंपनी भी इतना हो योगदान देती है। एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है। ईपीएफ अकाउंट में जमा रकम पर ब्याज मिलता है। ईपीएफओ की फाइनेंस, इनवेस्टमेंट और ऑडिट कमेटी की फरवरी के अंतिम हफ्ते में बैठक होगी। इसमें निवेश पर रिटर्न के आधार पर ब्याज दर का फैसला होगा। फिर सीबीटी के पास इसकी सिफारिश भेजी जाएगी।
EPFO Big Plan: ईपीएफओ करने वाला है ये बड़ा चेंज, लेबर कोड के बाद कर्मचारियों के लिए इस कदम के क्या हैं मायने?
वेज सीलिंग कितनी है?
अगर सीबीटी ब्याज दर को मंजूरी देती है तो इसे वित्त मंत्रालय से भी मंजूरी की जरूरत होगी। उसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इसे आधिकारिक रूप से नोटिफाई करेगा और साल के मध्य में ब्याज की राशि सब्सक्राइबर्स के खातों में डाली जाएगी। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुड्डुचेरी में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए ब्याज दरों को लगातार तीसरे साल यथावत रखा जा सकता है।
साथ ही बोर्ड वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकता है। हालांकि अभी सीबीटी की मीटिंग का एजेंडा फाइनल नहीं हुआ है। जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को निर्देश दिया था कि वह वेज सीलिंग पर चार महीने के भीतर विचार करे। इस सीलिंग में आखिरी बार 2014 में बदलाव हुआ था। तब से अब तक सैलरी में काफी इजाफा हो चुका है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी लेबर मिनिस्ट्री से कहा था कि वह चार महीने के अंदर इस लिमिट की समीक्षा करे।
क्या है सैलरी लिमिट?
सैलरी लिमिट का मतलब वह बेसिक सैलरी है, जिस पर किसी कर्मचारी के लिए पीएफ (PF) में योगदान देना कानूनी रूप से जरूरी होता है। मौजूदा नियम के मुताबिक, अगर आपकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा है तो पीएफ कटवाना आपकी मर्जी पर निर्भर करता है। सरकार ने पहले भी इस लिमिट को 25,000 रुपये करने पर विचार किया था। हालांकि तब कंपनियों के विरोध की वजह से इसे टाल दिया गया था। कंपनियों का कहना था कि इससे उन पर बोझ बढ़ेगा।














