एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सेबी चीफ ने ‘SEBI Check’ जैसे टूल का जिक्र किया। इसकी मदद से कोई भी निवेशक यह जांच सकता है कि जिस संस्था में वह पैसा लगा रहा है, वह असली है या नहीं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे ‘डेरिवेटिव्स’ जैसे जटिल और जोखिम भरे ट्रेड के बजाय SIP और म्यूचुअल फंड जैसे लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान दें। उन्होंने बिना रजिस्ट्रेशन वाले फिनफ्लुएंशर्स के झांसे में न आने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि सेबी का पूरा ध्यान ‘कॉरपोरेट बॉण्ड मार्केट’ पर है।
सेबी लाया ‘लाइफ साइकल फंड’, नियमों में किया बदलाव, अब काम के आधार पर होंगे स्कीमों के नाम
ज्यादा रिटर्न का लालच
सेबी चीफ ने कहा कि खासकर देश के बढ़ते खुदरा निवेशक आधार को देखते हुए निवेशकों की सतर्कता केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर, सोच-समझकर कदम उठाने में तब्दील होनी चाहिए। निवेश से पहले धोखाधड़ी से संबंधित एक सवाल के जवाब में, पांडेय ने कहा कि बाजार में प्रवेश करने के इच्छुक कई व्यक्ति सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ तक पहुंचने से पहले ही ‘घोटालेबाजों’ के चंगुल में फंस जाते हैं। अभी देश में 14 करोड़ से अधिक निवेशक हैं।
उन्होंने कहा, ‘निवेश करने का इरादा रखने वाला व्यक्ति वास्तव में ज्यादा रिटर्न के वादों के जाल में फंस रहा है। मामला सेबी या किसी ब्रोकर तक पहुंचता ही नहीं क्योंकि व्यक्ति पहले ही जाल में फंस चुका होता है।’ पांडेय ने कहा कि निवेशकों को लुभाने के लिए वट्सएप ग्रुप, फर्जी ऐप और अन्य डिजिटल चैनल का यूज बढ़ रहा है। उन्होंने ऐसे कई मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि नियामक ने इस खतरे को रोकने और निवेशकों के पैसे की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं।














