द वॉर जोन के मुताबिक, सिंगापुर एयरशो में पत्रकारों से बात करते हुए बोइंग डिफेंस स्पेस एंड सिक्योरिटी के बिजनेस डेवलपमेंट और स्ट्रेटेजी के वाइस प्रेसिडेंट बर्न्ड पीटर्स ने पुष्टि की है कि इंडोनेशिया के लिए F-15EX पर कंपनी में अब कोई एक्टिव कैंपेन नहीं है। हालांकि बोइंग ने इस डील से जुड़े सवालों पर ज्यादा चीजें साफ नहीं की हैं।
2022 में शुरू हुई थी बातचीत
फरवरी 2022 में अमेरिकी विदेश विभाग ने इंडोनेशिया को F-15EX के एक वेरिएंट F-15ID की विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दी थी। इसके बाद अगस्त 2023 में इस पर बड़ा फैसला हुआ, जब जकार्ता ने औपचारिक रूप से बोइंग से 24 जेट खरीदने का वादा किया।
बोइंग ने 2023 में इंडोनेशियाई वर्जन का नाम बदलकर F-15IND कर दिया गया था। इसी दौरान जेट खरीद के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन हो गए। ऐसे में माना जा रहा था कि ये डील तकरीबन फाइनल है और इंडोनेशिया को ये जेल जल्दी ही मिल जाएंगे।
दो साल तक ठंडे बस्ते में डील
अगस्त 2023 में दोनों पक्षों की ओर से दिखाई गई गर्मजोशी जल्दी ही खत्म हो गई। इस डील को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। दो साल तक इस डील पर लगातार हीलाहवाली चलती रही और कई चीजें साफ नहीं हो सकीं। अब सामने आया है कि इंडोनेशिया ने इस जेट को खरीदने से कदम पीछे खींच लिए हैं।
इंडोनेशिया के ये विमान नहीं खरीदने की बात सामने आई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इंडोनेशियाई सरकार F-15 के बजाय अमेरिकी कंपनी बोइंग से कोई दूसरा फाइटर टाइप खरीदेगी या पुरानी डील पर कैसे चीजों का निपटारा किया जाएगा। सरकार से इस पर स्पष्टीकरण नहीं मिला है।
फ्रांस ने अमेरिका से मारी बाजी
अमेरिकी विदेश विभाग की F-15 देने की मंजूरी और इंडोनेशिया की फ्रांस के डसॉल्ट राफेल के 42 विमान खरीदने की डील एक ही समय हुई थी। इंडोनेशिया को शुरुआती राफेल की डिलीवरी जनवरी में हो चुकी है। दूसरी ओर अमेरिकी F-15 डील से जुड़ी शर्तें ही अब तक साफ नहीं हो सकीं हैं।
इंडोनेशिया ने अमेरिका को संदेश दिया है कि वह F-15 के बिना अपनी वायु सेना को आधुनिक बना सकती है। राफेल के अलावा इंडोनेशियाई वायु सेना के पास अमेरिकी और रूसी फाइटर विमान हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा निर्यात के लिहाज से यह डील कैंसिल होना निश्चित ही निराशाजनक है।













