लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में तैनात बैक्ट्रियन केमल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद आपूर्ति के लिए बेहद अहम रहे हैं। ये कठिन रास्तों और तीखी चढ़ाइयों पर भारी सामान ढोने में लगातार सेना की मदद करते रहे हैं। जंस्कार पोनी भी सियाचिन ग्लेशियर की बर्फीली ऊंचाइयों और अग्रिम क्षेत्रों में सैनिकों का मजबूती से साथ निभाते रहे हैं। निगरानी, ट्रैकिंग और अन्य ऑपरेशनल कामों के लिए प्रशिक्षित आर्मी डॉग्स ने अलग-अलग इलाकों में सैनिकों की सुरक्षा और अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
गणतंत्र दिवस की परेड में किए गए थे प्रदर्शित
गौरतलब है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह पर पहली बार शक्ति बाण, दिव्यास्त्र बैटरी, भैरव बटालियन, यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम, रोबोटिक डॉग, ईगल, बैक्ट्रियन कैमल व जंस्कार पोनी नजर आए थे।
वायुसेना ने प्रदर्शित किया ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन
वहीं गणतंत्र दिवस समारोह में वायुसेना का फ्लाइ पास्ट भी इस बार बेहद खास रहा। वायुसेना के फाइटर जेट फ्लाइ पास्ट के दौरान आसमान में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन प्रदर्शित किया गया। यह फॉर्मेशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की याद दिलाता है। इस फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 मिग 29, दो सुखोई-30 और एक जैगुआर विमान कर्तव्य पथ के ऊपर आसमान में नजर आए। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुल नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ गणतंत्र दिवस परेड तथा भारत पर्व 2026 में अपनी कई स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया। इन प्रमुख प्रणालियों में लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल रही। डीआरडीओ द्वारा गणतंत्र दिवस परेड के दौरान स्वदेशी तकनीक पर विकसित किए गए घातक हथियारों का प्रदर्शन किया गया। जिसमें लॉन्चर सहित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल रही। यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।













