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  • बलूचिस्तान में बुरी तरह पिटी पाकिस्तानी सेना! मुनीर को बचने के लिए सैनिकों की मौत को छिपा रहा पाकिस्तान?

    इस्लामाबाद: पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को दावा किया कि उसने बलूचिस्तान विद्रोह को दबा दिया है। सेना ने कहा कि उसने आतंकवाद विरोधी अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर दिया है। पाकिस्तानी सेना ने यह भी दावा किया कि इस ऑपरेशन के दौरान बलूचिस्तान में 216 विद्रोही मारे गए हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने पिछले हफ्ते


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    By Azad Hind Desk फरवरी 6, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को दावा किया कि उसने बलूचिस्तान विद्रोह को दबा दिया है। सेना ने कहा कि उसने आतंकवाद विरोधी अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर दिया है। पाकिस्तानी सेना ने यह भी दावा किया कि इस ऑपरेशन के दौरान बलूचिस्तान में 216 विद्रोही मारे गए हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने पिछले हफ्ते विद्रोही समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमलों में मारे गए पाकिस्तानी सैनिकों की संख्या को कम बताया। वहीं, अनुमान जताया गया है कि बीएलए के अलग-अलग हमलों में कम से कम 100 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

    सैनिकों की मौत को छिपा रहा पाकिस्तान?

    हमारे सहयोगी प्रकाशन टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना जानबूझकर बीएलए के हमलों में हुए नुकसान को कम करके बता रही है। इसका प्रमुख कारण फील्ड मार्शल असीम मुनीर को शर्मिंदगी से बचाना है। पाकिस्तानी सेना को डर है अगर बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक होता है तो इससे सेना और मुनीर की छवि को भारी नुकसान होगा। इतना ही नहीं, देश में मुनीर के खिलाफ एक माहौल भी बनेगा, जिसका फायदा विपक्षी पार्टियां उठा सकती हैं।

    बेहतरीन हथियारों से लैस हैं बीएलए विद्रोही

    बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके पाकिस्तानी सेना से भी अच्छे हथियारों और उपकरणों से लैस हैं। इसे खुद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्वीकार किया है। उन्होंने सासंदों को संबोधित करते हुए कहा था कि बीएलए का एक-एक लड़ाका 20,000 डॉलर के सैन्य साजो-सामान से लैस है। उनकी राइफलें भी 2000 डॉलर की हैं। इतना ही नहीं, यह भी दावा किया गया है कि बीएलए विद्रोहियों के हथियार उम्दा किस्म हैं और वैसे हथियार पाकिस्तानी सैनिकों के पास भी नहीं हैं।

    बलूच विद्रोहियों की मांगें क्या हैं

    बलूच विद्रोहियों का कहना है कि वह अपने हक और पाकिस्तान की भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तान सिर्फ उनका शोषण कर रहा है और उसका लाभ सिर्फ एक चुनिंदा सूबे को हो रहा है। बलूच लोगों ने अपने सूबे में विदेशी निवेश का भी विरोध किया है और इसे शोषण करार दिया है। उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने और आम नागरिकों की हत्याएं करने का आरोप भी लगाया है।

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