जमात में महिलाओं को मौका नहीं
महिलाओं को लेकर जमात-ए-इस्लामी की यह सोच कोई नई नहीं है। कुछ दिन पहले ही एक इंटरव्यू में रहमान ने कहा था कि किसी महिला के लिए जमात-ए-इस्लामी का नेतृत्व करना सभव नहीं है। जमात अमीर ने तर्क दिया कि अल्लाह ने पुरुषों और महिलाओं को अलग बनाया है। उन्होंने बच्चे के जन्म और महिलाओं के स्तनपान का जिक्र किया और कहा कि ये जैविक अंतर नेतृत्व की भूमिका तय करते हैं।
जमात-ए-इस्लामी चीफ का तालिबानी चेहरा
रहमान ने कबूल किया कि पार्टी ने संसदीय चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार को नहीं उतारा और इसे सही ठहराया। हालांकि, पाकिस्तान की समर्थक मानी जाने वाली जमात-ए-इस्लामी के नेता ने बाहर निकलकर काम करने वाली महिलाओं की तुलना वेश्या से करके लोगों को नाराज कर दिया है। रहमान के बयान की कड़ी आलोचना हो रही है। सूत्रों ने कहा कि यह जमात का असली चेहरा दिखाता है कि वे किस तरह देश को पीछे के दौर में ले जाना चाहते हैं।
जमात को अमेरिका का मिला समर्थन
यह साफ दिखाता है कि जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश में तालिबान जैसी नीतियां लागू करने की कोशिश कर रही है। अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान की सत्ता में आने में मदद की थी, उसके नतीजे आज भी अफगानिस्तान की महिलाएं भुगत रही हैं। अब अमेरिका जमात से नजदीकी बढ़ा रहा है। ढाका में अमेरिकी राजदूत जमात के नेताओं से मिल रहे हैं। अमेरिका पर जमात की राजनीति को निर्देशित करने का आरोप लग रहा है। ऐसे में वॉशिंगटन को जमात के मंसूबों से सावधान रहना चाहिए।













