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  • बांग्लादेश पर पूर्ण कब्जा, भारत से 1971 का बदला, बहुत ही खतरनाक है पाकिस्तान की प्लानिंग

    नई दिल्ली: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत के साथ उसके संबंध लगभग टूट से गए हैं। इसी दौरान जब से मोहम्मद यूनुस ने वहां अंतरिम सरकार की कमान संभाली है, पाकिस्तान की धीरे-धीरे चौतरफा दखल बढ़ गई है। जनरल असीम मुनीर की अगुवाई वाली पाकिस्तानी फौज के सत्ता पर


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    नई दिल्ली: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत के साथ उसके संबंध लगभग टूट से गए हैं। इसी दौरान जब से मोहम्मद यूनुस ने वहां अंतरिम सरकार की कमान संभाली है, पाकिस्तान की धीरे-धीरे चौतरफा दखल बढ़ गई है। जनरल असीम मुनीर की अगुवाई वाली पाकिस्तानी फौज के सत्ता पर बढ़ते प्रभाव के बीच पाकिस्तान न केवल बांग्लादेश में भारत-विरोधी नफरती माहौल के विस्तार में सफल हुआ है,बल्कि उसने अपने पूर्ववर्ती हिस्से के साथ रक्षा और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने में भी सफलता पाई है।

    1971 की हार का बदला लेना है एजेंडा

    न्यूज एजेंसी एआईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में पाकिस्तान का मेन एजेंडा 1971 की हार का बदला लेना है। जैसे ही शेख हसीना की सरकार गिरी, इसने जमात-ए-इस्लामी का इस्तेमाल करके वहां अपने मनसूबे को पूरा करने का काम शुरू कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का कहना है कि यूनुस के जरिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई चाहती है कि वह जितना हासिल किया जा सकता है कर ले। अगर चुनाव से पहले यह संभव नहीं हुआ तो इसे रद्द करवाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा।

    आतंकियों की मदद में आईएसआई सक्रिय

    अपनी योजना के अनुसार आईएसआई ने ढाका में एक सेल स्थापित कर लिया है। इसकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि जो आतंकवादी संगठन वहां से गायब हो चुके थे, वे फिर से सक्रिय हो जाएं। इसके लिए लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को ढाका भेजा जा चुका है, जो स्थानीय आतंकियों को नए सिरे से ट्रेंड कर सकें और जरूरत पड़े तो नई भर्तियां भी कर सकें।

    बांग्लादेश से व्यापारिक रिश्ते भी बढ़ा रहा

    इसके साथ ही पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ कारोबार भी बढ़ा रहा है। इसी कोशिश में समुद्री रास्ते खोले जा रहे हैं। भारत इसको लेकर चिंता भी जता चुका है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इससे न सिर्फ आतंकियों की आवाजाही के रास्ते बनेंगे, बल्कि यहां से हथियारों की सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। नवंबर 2024 में ही पहला पाकिस्तानी कार्गो जहाज चटगांव बंदरगाह पहुंच गया था। फिर दोनों देशों ने ज्वाइंट इकॉनोमिक कमीशन को जीवित किया, जो दो दशकों से मृत पड़ा था।

    पाकिस्तानी फौज का बढ़ रहा दबदबा

    इसके बाद से दोनों देशों में व्यापार में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान से बांग्लादेश को कॉटन यार्न, मशीनरी और केमिकल्स की सप्लाई में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान से बांग्लादेश को निर्यात 2024 के 778.11 मिलियन डॉलर के मुकाबले 2025 में 20 प्रतिशत बढ़ गया। इस दौरान पाकिस्तान की फौज ने बांग्लादेश पर अपना प्रभाव बढ़ाने में पूरा जोर लगा दिया।

    बांग्लादेश को हथियार देने पर भी जोर

    दोनों देशों के बीच कई हाई-लेवल मीटिंग हो चुकी हैं। पिछले साल एक ऐसी ही मीटिंग में पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल साहिर शमशाद मिर्जा मोहम्मद यूनुस से मिलने पहुंचे थे। इस समय में दोनों देशों ने अमन-225 के नाम से नौसैनिक अभ्यास भी किया। दोनों देशों के बीच यह बात भी बनी कि पाकिस्तान बांग्लादेश को JF-17 थंडर फाइटर जेट बेचेगा। इसके अलावा उसने पाकिस्तान से 155एमएम आर्टिलरी गोला-बारूद के 40,000 राउंड खरीदने की भी हामी भर दी।

    ‘बांग्लादेश पर कंट्रोल करना चाहता है’

    2024 के लगभग आधा हिस्सा पार करने के बाद शेख हसीना ने बांग्लादेश छोड़ा था। उसके बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने ढाका की करीब 1,950 बार यात्राएं कीं। पिछले साल यह संख्या बढ़कर 3,387 हो गई। अगर हालात को समझने की कोशिश करें तो पाकिस्तान उसी राह पर चल रहा है, जिस स्थिति में वह 1971 से पहले हुआ करता था। वह देर-सबेर बांग्लादेश पर कब्जा करना चाहता है। अधिकारियों ने कहा है कि व्यापार बढ़ाने का तो सिर्फ बहाना है, पाकिस्तान यह नहीं चाहता कि बांग्लादेश की जनता को लगे कि उनका भारत के खिलाफ लॉन्चपैड की तरह इस्तेमाल हो रहा है।

    भारत को है चुनावों का इंतजार

    इंटेलिजेंस के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश में लंबा खेल खेलना चाहता है। वह ऐसी हालात तैयार करना चाहता है, जिसमें वह पूरी तरह से पाकिस्तान पर निर्भर हो जाए, जिससे किसी भी सरकार का उसके सहयोग के बिना चलना नामुमकिन हो। भारत इन हालातों पर नजर रख रहा है। अभी भारत की प्राथमिकता अपनी सीमाओं की सुरक्षा और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की हिफाजत है। भारत अभी फरवरी के लिए घोषित चुनाव का इंतजार कर रहा है।

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